भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) उछलकर **$785.71 अरब** के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। एक ही हफ्ते में **$44.9 अरब** की ऐतिहासिक बढ़ोतरी के साथ भारत अब दुनिया का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाला देश बन गया है।
बड़ी उपलब्धि: दुनिया में चौथे नंबर पर भारत
4 सितंबर, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $785.71 अरब के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है। केवल एक हफ्ते में $44.9 अरब का इजाफा इतना बड़ा है कि इसने भारत को रूस को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक रैंकिंग में चौथा स्थान दिला दिया है।
क्यों आया इतना बड़ा उछाल?
इस तेजी का मुख्य श्रेय Reserve Bank of India (RBI) की FCNR (Foreign Currency Non-Resident) डिपॉजिट स्कीम को जाता है। इस साल की शुरुआत में शुरू की गई इस सुविधा ने प्रवासी भारतीयों (NRI) से भारी पूंजी आकर्षित की। 31 अगस्त, 2026 तक इस योजना के जरिए लगभग $127.23 अरब का इनफ्लो आया। बाजार से मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया को देखते हुए, RBI ने अपनी इस स्वैप विंडो को समय से एक महीने पहले ही 31 अगस्त को बंद कर दिया था।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
यह भारी-भरकम रिजर्व भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगा। Indian Rupee में आने वाली अस्थिरता को थामने के लिए RBI के पास अब पहले से कहीं ज्यादा ताकत है। विशेष रूप से पश्चिमी एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव के समय यह भंडार देश के लिए 'बफर' की तरह काम करेगा।
मार्केट की नजरें किस पर?
हालांकि, इतनी बड़ी उपलब्धि के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। इन स्वैप अरेंजमेंट्स को पूरा करने के लिए RBI ने हेजिंग (Hedging) लागत उठाई है। मार्केट एनालिस्ट इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि इन खर्चों का असर RBI की बैलेंस शीट पर कितना होगा। फिलहाल, निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय बैंक भविष्य में इन फंड्स को अमेरिकी ट्रेजरी जैसी संपत्तियों में कैसे निवेश करता है और लिक्विडिटी को किस तरह मैनेज करता है।
