भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 21 अगस्त, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार **$729.3 अरब** के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। RBI की खास 'स्वैप फैसिलिटी' के कारण इसमें बड़ा उछाल आया है, लेकिन अब निवेशकों की नजर **31 अगस्त** की डेडलाइन पर है, जिसके बाद करेंसी बाजार में हलचल हो सकती है।
आंकड़ों की बाजीगरी
महज एक हफ्ते के भीतर विदेशी मुद्रा भंडार में $12.422 अरब का भारी-भरकम इजाफा हुआ है, जिससे कुल आंकड़ा $729.328 अरब दर्ज किया गया। जून 2026 में शुरू की गई RBI की स्पेशल स्वैप फैसिलिटी ने विदेशी मुद्रा को देश के भीतर लाने और रुपए को मजबूती देने में बड़ी भूमिका निभाई है।
कैसे काम की RBI की स्वैप फैसिलिटी?
RBI ने बैंकों को फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) डिपॉजिट के जरिए विदेशी मुद्रा लाने के लिए प्रोत्साहित किया था। जून से अब तक कुल $72.8 अरब का इनफ्लो आया है, जिसमें से करीब $65.397 अरब का हिस्सा केवल FCNR डिपॉजिट से आया है। इसके अलावा, $7.451 अरब की राशि एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग और अन्य ओवरसीज लोन के जरिए प्राप्त हुई है।
भविष्य की चुनौतियां और रिस्क
भले ही यह रिकॉर्ड भंडार ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता और तेल की कीमतों के झटकों से बचने के लिए एक मजबूत कवच (Shock Absorber) की तरह काम कर रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे 'डेट-फंडेड' ग्रोथ मान रहे हैं। यह आमदनी व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) से नहीं, बल्कि उधारी और इंसेंटिव से आई है।
RBI ने इस स्वैप विंडो को बंद करने की तारीख भी पहले ही 31 अगस्त, 2026 तय कर दी है। अब बाजार इस बात पर नजर रखे हुए है कि जब यह लिक्विडिटी इंजन बंद होगा, तो क्या रुपया दबाव में आएगा? क्या मौजूदा रिजर्व आने वाले समय के मार्केट स्ट्रेस को झेलने के लिए काफी है? निवेशकों को अब देखना होगा कि इस राहत के बिना बाजार का रुख क्या रहता है।
