30 अक्टूबर 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) **$2.69 अरब** घटकर **$717.06 अरब** रह गया है। यह गिरावट रुपये की अस्थिरता को रोकने के लिए RBI के बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप को दर्शाती है।
रुपये की सुरक्षा और RBI का एक्शन
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है ताकि रुपये की कीमत में अचानक आने वाली गिरावट को रोका जा सके। जब भी ग्लोबल मार्केट के दबाव के कारण रुपये पर दबाव बनता है, RBI अपने भंडार से अमेरिकी डॉलर बेचकर बाजार में तरलता (Liquidity) बनाए रखता है। इस बार की गिरावट के पीछे बाजार में हस्तक्षेप के अलावा FCNR(B) खातों के माध्यम से जुटाई गई राशि का नियोजित उपयोग भी एक बड़ा कारण है।
रिजर्व में कहां-कहां आई कमी?
विदेशी मुद्रा भंडार के मुख्य घटकों में व्यापक कमी देखने को मिली है:
- विदेशी मुद्रा संपत्ति (Foreign Currency Assets): यह भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा है, जो $2.088 अरब घटकर $591.118 अरब रह गया है।
- स्वर्ण भंडार (Gold Reserves): इसमें $559 मिलियन की कमी आई और यह $102.591 अरब पर आ गया है।
- SDR: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के पास मौजूद स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स में $47 मिलियन की गिरावट दर्ज की गई है।
सितंबर की शुरुआत में हमारा विदेशी मुद्रा भंडार $785.706 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर था। हालांकि मौजूदा $717.06 अरब का आंकड़ा उस पीक से नीचे है, लेकिन आर्थिक स्थिरता के लिहाज से यह अभी भी एक मजबूत बफर माना जा रहा है।
निवेशकों को किन बातों पर रखना है नजर?
आने वाले समय में बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि RBI विदेशी मुद्रा के आउटफ्लो और रुपये की स्थिरता के बीच संतुलन कैसे बैठाता है। ग्लोबल ऑयल की कीमतें, अमेरिका की ब्याज दरें और भारत में आने वाला विदेशी निवेश (FII/FDI) यह तय करेंगे कि आने वाले महीनों में RBI की रणनीति क्या रहती है।
