सरकार ने Flexible Inflation Targeting (FIT) फ्रेमवर्क को 31 मार्च 2031 तक बढ़ा दिया है। इसमें रिटेल इन्फ्लेशन का टारगेट **4%** पर बरकरार रहेगा, जिसमें **2%** से **6%** के दायरे की छूट दी गई है।
भारत सरकार ने Flexible Inflation Targeting (FIT) फ्रेमवर्क को अगले पांच सालों के लिए आगे बढ़ा दिया है। साल 2016 में शुरू हुई इस व्यवस्था का मुख्य काम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के जरिए महंगाई को 4% (प्लस-माइनस 2%) के दायरे में नियंत्रित रखना है।\n\n### निवेशकों के लिए क्यों है अहम?\n\nस्टॉक मार्केट के लिहाज से यह फैसला पॉलिसी कंटिन्यूटी (Policy Continuity) का संकेत है। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) इसी टारगेट को आधार मानकर इंटरेस्ट रेट्स तय करती है। अगर महंगाई 6% के ऊपर जाती है, तो RBI को रेट्स बढ़ाने पड़ते हैं, जिससे कंपनियों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है और उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आता है। वहीं, अगर महंगाई दायरे में रहे, तो रियल एस्टेट, ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर को राहत मिलती है।\n\n### चुनौतियां अभी भी बरकरार\n\nभले ही फ्रेमवर्क फिक्स हो गया है, लेकिन हकीकत यह है कि महंगाई पर पूरी तरह काबू पाना आसान नहीं है। हमारे यहाँ रिटेल इन्फ्लेशन में खाने-पीने की चीजों और फ्यूल का बड़ा हिस्सा है। ग्लोबल कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें और मानसून की अनिश्चितता जैसे फैक्टर RBI के कंट्रोल के बाहर हैं।\n\n### RBI की जवाबदेही\n\nइस फ्रेमवर्क में एक कड़ा अकाउंटेबिलिटी मैकेनिज्म भी है। अगर RBI लगातार 3 तिमाहियों तक महंगाई को 6% के नीचे रखने में नाकाम रहता है, तो उसे सरकार को औपचारिक जवाब देना होगा कि चूक क्यों हुई और उसे सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मार्केट के जानकारों के लिए अब नजरें इस बात पर होंगी कि आने वाले समय में MPC विकास (Growth) और महंगाई के बीच कैसा बैलेंस बनाती है।
