Currency in Circulation: कैश का नया रिकॉर्ड! ₹43.46 ट्रिलियन के स्तर पर पहुंची नकदी, अब RBI के एक्शन पर नजर

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AuthorAditya Rao|Published at:
Currency in Circulation: कैश का नया रिकॉर्ड! ₹43.46 ट्रिलियन के स्तर पर पहुंची नकदी, अब RBI के एक्शन पर नजर

देश में सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी **₹43.46 ट्रिलियन** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। पिछले एक साल में इसमें **13.5%** की बढ़ोतरी देखी गई है। त्योहारी सीजन के बीच RBI अब सिस्टम से अतिरिक्त लिक्विडिटी (liquidity) निकालने की तैयारी में है, जिसका सीधा असर शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों पर पड़ सकता है।

नकदी का रिकॉर्ड स्तर और उसकी वजह

अक्टूबर 2026 के मध्य तक भारतीय अर्थव्यवस्था में सर्कुलेशन में मौजूद कैश ₹43.46 ट्रिलियन के पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में इसमें 13.5% का इजाफा हुआ है। इस तेजी के पीछे जून में RBI द्वारा शुरू की गई विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा का बड़ा हाथ है, जिससे $133 बिलियन के FCNR(B) डिपॉजिट्स को जुटाने में मदद मिली।

इसके साथ ही, रिजर्व मनी (जो कुल मनी सप्लाई का आधार है) भी 10.3% बढ़कर ₹53.24 ट्रिलियन हो गई है। यह लिक्विडिटी पिछले कुछ महीनों में बाजार को स्थिर रखने के लिए मददगार रही, लेकिन अब RBI का रुख बदल रहा है।

RBI की बदलती रणनीति और निवेशकों के लिए संकेत

पिछले फाइनेंशियल ईयर में RBI ने ओपन मार्केट ऑपरेशंस के जरिए ₹8.8 ट्रिलियन की लिक्विडिटी सपोर्ट दी थी, लेकिन अब त्योहारी सीजन की मांग और मॉनेटरी कंडीशन को स्थिर रखने के लिए सेंट्रल बैंक इस अतिरिक्त नकदी को वापस खींचने (withdraw) की योजना बना रहा है।

निवेशकों के लिए यह बदलाव काफी अहम है, क्योंकि लिक्विडिटी घटने से शॉर्ट-टर्म उधार लेना महंगा हो सकता है और कंपनियों के लिए फंड जुटाने की लागत बढ़ सकती है। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत दिख रही है, जिसमें सर्विस सेक्टर और आंतरिक मांग का बड़ा योगदान है। साथ ही, बेहतर FDI और रेमिटेंस ने ट्रेड डेफिसिट को संभालने में भी मदद की है। अब बाजार की नजर RBI के अगले डेटा और ब्याज दरों पर उनकी कमेंट्री पर टिकी है, जो आने वाले समय में उधार की लागत तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.