अगस्त 2026 में भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BoP) सरप्लस उछलकर **$45.4 बिलियन** पहुंच गया है। पिछले साल के घाटे से उबरते हुए, इस शानदार प्रदर्शन के पीछे NRI डिपॉजिट और विदेशी निवेश की बड़ी भूमिका है। इसी बीच, RBI ने बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए करेंसी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर नए नियम जारी किए हैं।
अगस्त 2026 में भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति में मजबूती देखने को मिली है। पिछले साल की समान अवधि में $5.6 बिलियन के घाटे के मुकाबले, इस बार का सरप्लस अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता को दर्शाता है।
NRI निवेश और बैंकिंग कैपिटल की ताकत
इस सरप्लस का सबसे बड़ा कारण बैंकिंग कैपिटल में आया भारी उछाल है, जो $64.7 बिलियन तक पहुंच गया है। इसमें सबसे अहम भूमिका NRI डिपॉजिट्स की रही, जो पिछले साल के $1 बिलियन से बढ़कर सीधे $83 बिलियन पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा, फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) $3.3 बिलियन और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) $1.7 बिलियन रहा, जिसने पिछले दौर के आउटफ्लो की भरपाई कर दी है।
व्यापारिक आंकड़े और RBI की नई गाइडलाइंस
देश का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) भी सुधरकर $5.2 बिलियन पर आ गया है। हालांकि मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट $26.6 बिलियन बना हुआ है, लेकिन सर्विस सेक्टर ने $16.5 बिलियन के सरप्लस के साथ बड़ी राहत दी है।
इन्हीं सबके बीच, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व के नियमों को सख्त कर दिया है। अब $2 मिलियन से अधिक के करेंसी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर ये नए नियम लागू होंगे। हालांकि, RBI ने सेल-साइड कॉन्ट्रैक्ट्स को इससे बाहर रखा है और बैंकों को चेतावनी दी है कि वे इन नियमों से बचने के लिए जटिल स्ट्रक्चर्स का इस्तेमाल न करें। यह कदम रुपये में आने वाली हालिया अस्थिरता को रोकने के लिए उठाया गया है।
