Bank Credit Growth: भारत में कर्ज का बढ़ा जोर! क्रेडिट ग्रोथ **19.1%** पर पहुंची, निवेशकों के लिए क्या हैं खतरे?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Bank Credit Growth: भारत में कर्ज का बढ़ा जोर! क्रेडिट ग्रोथ **19.1%** पर पहुंची, निवेशकों के लिए क्या हैं खतरे?

भारत में जुलाई 2026 तक बैंक लेंडिंग में **19.1%** की तेज उछाल दर्ज की गई है, जिसकी मुख्य वजह इंडस्ट्रियल और सर्विस सेक्टर से आई भारी मांग है। हालांकि, डिपॉजिट ग्रोथ के मुकाबले कर्ज की रफ्तार बढ़ना बैंकों के लिए फंड जुटाने की चुनौती बन सकता है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय बैंकों के लोन बुक में तेजी से विस्तार हो रहा है। 31 जुलाई 2026 तक समाप्त हुए पखवाड़े में नॉन-फूड बैंक क्रेडिट ग्रोथ 19.1% तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के 9.9% के मुकाबले एक बड़ी छलांग है।

कहाँ से आ रही है इतनी मांग?

यह ग्रोथ केवल रिटेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी 20% की बढ़त देखी गई है। इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटल, इंजीनियरिंग और केमिकल्स जैसी बड़ी कंपनियों की ओर से फंड की मांग बढ़ी है। वहीं, सर्विस सेक्टर ने 22.9% की रफ्तार के साथ सबसे आगे है, जबकि एग्रीकल्चर सेक्टर में भी 17% की अच्छी ग्रोथ दर्ज की गई है।

बैंकों के लिए बड़ा रिस्क

अच्छी आर्थिक गतिविधियों के बावजूद, बैंकों के लिए एक चुनौती खड़ी हो गई है। बैंक की डिपॉजिट ग्रोथ सिर्फ 15.4% है, जो क्रेडिट ग्रोथ से काफी पीछे है। इस असंतुलन के कारण लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो (LDR) करीब 80.3% हो गया है। अगर बैंकों को डिपॉजिट जुटाने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ा, तो उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव आ सकता है।

रिटेल लोन में बदलाव

पर्सनल लोन सेगमेंट में 16.2% की तेजी बनी हुई है, लेकिन क्रेडिट कार्ड और छोटे गोल्ड लोन की मांग में थोड़ी नरमी आई है। यह संकेत है कि बैंक अब अनसेक्योर्ड लोन को लेकर थोड़े सतर्क हो गए हैं।

आने वाले समय में, जिन बैंकों का डिपॉजिट बेस मजबूत होगा, वे बेहतर स्थिति में रहेंगे। वहीं, जो बैंक थोक फंडिंग (wholesale funding) पर ज्यादा निर्भर हैं, उनके लिए मुनाफा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.