Income Tax Department ने अपनी ई-फाइलिंग वेबसाइट पर FAST-DS 2026 स्कीम के तहत 'Form 1' लाइव कर दिया है। यह एक सुनहरा मौका है जिसके जरिए टैक्सपेयर्स अपनी अनदेखी विदेशी संपत्ति, जैसे ESOPs और बैंक अकाउंट्स को **31 दिसंबर 2026** तक डिक्लेयर कर सकते हैं।
दो तरह के हैं रास्ते (Disclosure Paths)
इस स्कीम में नियमों का पालन आसान बनाने के लिए दो रास्ते दिए गए हैं। पहला रास्ता उन लोगों के लिए है जिनकी संपत्ति या इनकम ₹1 करोड़ तक है, जिन पर 60% की लेवी (30% बेस टैक्स और 30% अतिरिक्त टैक्स) लगेगी। दूसरा विकल्प उन लोगों के लिए है जिनकी एसेट्स ₹5 करोड़ तक हैं, वे ₹1 लाख की फ्लैट फीस जमा करके रिपोर्टिंग की कमियों को दूर कर सकते हैं। सही कैटेगरी चुनना बहुत जरूरी है, वरना आवेदन रिजेक्ट हो सकता है।
फाइलिंग और वैल्यूएशन के जोखिम
सभी एसेट्स का वैल्यूएशन 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार होना चाहिए। फाइलिंग करते समय बैंक स्टेटमेंट, इक्विटी ग्रांट लेटर्स और विदेशी इनकम के सबूत जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट्स पहले ही तैयार रखें। नॉन-बैंक एसेट्स के लिए 20% की टॉलरेंस लिमिट दी गई है, लेकिन अगर वैल्यूएशन में इससे ज्यादा का अंतर आता है, तो विभाग इसकी जांच कर सकता है।
टैक्सपेयर्स के लिए क्या है सलाह?
यह विंडो 31 दिसंबर 2026 तक खुली है। अगर आपने पिछले टैक्स रिटर्न में विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं किया है, तो यह समय अपनी गलतियों को सुधारने का है। स्कीम का उद्देश्य ब्लैक मनी एक्ट के तहत आने वाली सख्त पेनल्टी से सुरक्षा देना है, इसलिए अपनी जानकारी और डॉक्यूमेंट्स को लेकर पूरी सावधानी बरतें।
