Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) जयपुर ने एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि बैंक से निकाला गया कैश क्रेडिट कार्ड पेमेंट को साबित करने के लिए पर्याप्त है। ट्रिब्यूनल ने **₹10.9 लाख** की टैक्स डिमांड को खारिज करते हुए सख्ती से डेट-वाइज मिलान की शर्त को हटा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
ITAT जयपुर बेंच ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें टैक्स ऑफिसर ने क्रेडिट कार्ड पेमेंट को 'अस्पष्ट धन' (Unexplained Money) माना था। विवाद तब शुरू हुआ जब टैक्स अधिकारियों ने कहा कि टैक्सपेयर बैंक से निकाले गए कैश और क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट के बीच तारीख-दर-तारीख (date-wise) मिलान नहीं कर पाया।
ट्रिब्यूनल का तार्किक रुख
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि यदि बैंक स्टेटमेंट में पर्याप्त कैश निकासी दिख रही है, तो यह माना जाना चाहिए कि उन्हीं पैसों का इस्तेमाल कार्ड पेमेंट में हुआ है। जब तक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट यह साबित न करे कि वह कैश कहीं और खर्च हुआ था, तब तक उसे वैध माना जाएगा। इस फैसले के बाद अब टैक्स अधिकारियों को केवल तारीखों के तालमेल न बैठने के आधार पर टैक्सपेयर्स को परेशान करने के बजाय असली खामियां ढूंढनी होंगी।
टैक्सपेयर्स के लिए क्या बदल गया?
यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें सेक्शन 44AD के तहत घोषित बिजनेस इनकम को लेकर भी स्पष्टता आई है। ट्रिब्यूनल ने दोहरा टैक्स लगाने के जोखिम से टैक्सपेयर को राहत दी है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि रिकॉर्ड रखने की जरूरत खत्म हो गई है। बैंक ₹1 लाख से ज्यादा के कैश क्रेडिट कार्ड पेमेंट की रिपोर्ट करते हैं, इसलिए अपने वित्तीय लेनदेन का हिसाब रखना अब भी सबसे सुरक्षित विकल्प है।
