HSBC India के CEO हितेन दवे ने संकेत दिए हैं कि बढ़ती महंगाई के दबाव को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। फिलहाल रेपो रेट **5.25%** पर स्थिर है, लेकिन केंद्रीय बैंक हालात पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।
ब्याज दरों पर क्या है स्थिति?
RBI फिलहाल महंगाई के आंकड़ों पर लगातार नजर रख रहा है। HSBC India के CEO हितेन दवे का मानना है कि अगर कंज्यूमर प्राइस प्रेशर (Consumer Price Pressure) इसी तरह बना रहता है, तो चालू फाइनेंशियल ईयर के अंत तक RBI 'शैलो रेट-हाइक' (Shallow Rate-Hike) का रास्ता चुन सकता है। हालांकि मौजूदा रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है, लेकिन बाजार की निगाहें केंद्रीय बैंक की अगली बैठक पर टिकी हैं।
निवेशकों और कर्जदारों पर असर
यदि RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो उसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। ब्याज दरें बढ़ने का मतलब है कि पर्सनल लोन, होम लोन और कार लोन की EMI महंगी हो जाएगी। बैंकिंग सेक्टर के लिए यह स्थिति मिली-जुली हो सकती है; एक तरफ जहां बैंकों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, वहीं क्रेडिट ग्रोथ की डिमांड में सुस्ती आने का खतरा भी बना रहेगा।
किन सेक्टरों में होगा असर?
ब्याज दरें बढ़ने से सबसे ज्यादा असर रियल एस्टेट (Real Estate) और ऑटोमोबाइल (Automobile) जैसे इंटरेस्ट-सेंसिटिव सेक्टरों पर पड़ता है। लोन महंगे होने से इन सेक्टरों में खरीदारी की मांग कम हो सकती है, जिससे कंपनियों के वैल्युएशन पर दबाव दिख सकता है। इसके अलावा, इक्विटी मार्केट में भी लिक्विडिटी कम होने से उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि हाई-ग्रोथ स्टॉक की वैल्यूएशन पर इसका असर पड़ेगा।
आगे क्या देखें?
आने वाले हफ्तों में निवेशकों को मुख्य रूप से कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा और मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की मीटिंग के मिनट्स पर नजर रखनी चाहिए। यही वे दस्तावेज हैं जिनसे पता चलेगा कि केंद्रीय बैंक आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन कैसे बैठा रहा है।
