RBI Repo Rate: साल के अंत तक **6%** तक पहुंच सकती है रेपो रेट, HSBC का बड़ा अनुमान

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI Repo Rate: साल के अंत तक **6%** तक पहुंच सकती है रेपो रेट, HSBC का बड़ा अनुमान

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म HSBC ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को लेकर एक बड़ा अनुमान जताया है। बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों को काबू करने के लिए दिसंबर 2026 तक रेपो रेट **6%** तक जाने के आसार हैं।

रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर

HSBC के ताजा अपडेट के अनुसार, साल के अंत तक रेपो रेट में 75 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसका सीधा मतलब है कि रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त बना सकता है। रेपो रेट वह बेंचमार्क दर है जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं। जब इसमें इजाफा होता है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाता है, जिसका बोझ ग्राहकों पर होम, ऑटो और पर्सनल लोन की बढ़ी हुई ब्याज दरों के रूप में पड़ता है।

क्यों लिया जा सकता है यह फैसला?

इस अनुमान के पीछे दो बड़े कारण हैं:

  1. महंगाई (Inflation): देश में रिटेल महंगाई 5.5% के दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
  2. कच्चा तेल (Crude Oil): ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें $105 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो भारतीय रुपये पर दबाव डाल रही हैं।

सेक्टर पर क्या होगा असर?

ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सीधा असर रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर देखने को मिल सकता है। इन सेक्टरों में मांग में सुस्ती आ सकती है क्योंकि कर्ज महंगा होने से खरीदारों का उत्साह कम हो जाता है। वहीं, बैंकिंग सेक्टर के लिए यह मिली-जुली स्थिति है—जहां एक ओर उन्हें बेहतर ब्याज आय मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर लोन की धीमी ग्रोथ का जोखिम भी बना रहेगा।

हालांकि, HSBC ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर महंगाई 6% के ऊपरी स्तर से ऊपर बनी रहती है, तो रिजर्व बैंक और भी सख्त कदम उठा सकता है। फिलहाल निवेशकों को RBI की आगामी पॉलिसी मीटिंग और कंपनियों के अर्निंग्स पर नजर रखनी चाहिए, ताकि यह समझ सकें कि कॉर्पोरेट्स इस कठिन दौर से कैसे निपट रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.