57वीं GST काउंसिल की बैठक में बड़े सुधारों का ऐलान किया गया है, जो **1 अप्रैल, 2027** से प्रभावी होंगे। इसमें गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाना और प्रॉसीक्यूशन (Prosecution) की सीमा को बढ़ाकर **₹5 करोड़** करना शामिल है।
बड़े बदलाव और राहत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 8 अक्टूबर, 2026 को हुई 57वीं GST काउंसिल की बैठक में ऐतिहासिक बदलावों की घोषणा की है। सरकार का मकसद टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को 'ट्रस्ट-बेस्ड' और 'फेसलेस' बनाना है।
- गिरफ्तारी के नियम: अब GST ऑफिसर्स के पास अरेस्ट करने की पावर नहीं होगी, जिससे छोटे और मध्यम कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
- प्रॉसीक्यूशन लिमिट: कानूनी कार्रवाई की सीमा को मौजूदा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है।
- जुर्माने में कटौती: बिना किसी विशेष अपराध के सामान्य पेनल्टी को ₹25,000 से घटाकर ₹10,000 कर दिया गया है।
- छोटे नोटिसेज पर रोक: अब ₹10,000 से कम की छोटी मौद्रिक विसंगतियों (monetary discrepancies) के लिए विभाग कोई नोटिस जारी नहीं करेगा।
कारोबारियों के लिए क्या है संकेत?
यह बदलाव पारंपरिक और जटिल टैक्स सिस्टम से हटकर पूरी तरह से ऑटोमेटेड और डिजिटल फ्रेमवर्क की ओर इशारा करता है। इससे लिटिगेशन (Litigation) कम होगा और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, एक बात साफ है—सिस्टम के फेसलेस होने के कारण अब कंपनियों को अपने डेटा और इनवॉइस मैचिंग में पहले से कहीं ज्यादा सतर्क रहना होगा। चूंकि अब निगरानी पूरी तरह से टेक्नोलॉजी आधारित होगी, इसलिए छोटी सी गलती भी सरकारी सिस्टम में फ्लैग (Flag) हो सकती है। अब से GST दरों से संबंधित फैसले सालाना बैठक में अलग से लिए जाएंगे, ताकि पॉलिसी और प्रोसीजर में स्पष्टता बनी रहे।
