GST Council की बैठक: कंपनियों को मिलेगी बड़ी राहत, कर्मचारियों के इंश्योरेंस पर ITC की तैयारी

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AuthorMehul Desai|Published at:
GST Council की बैठक: कंपनियों को मिलेगी बड़ी राहत, कर्मचारियों के इंश्योरेंस पर ITC की तैयारी

7 अक्टूबर, 2026 को होने वाली GST Council की बैठक में एक बड़े बदलाव पर चर्चा होगी। अगर कंपनियों को कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम करने की अनुमति मिलती है, तो बिजनेस की ऑपरेशनल लागत में बड़ी कमी आएगी, जो अभी **18%** GST के बोझ तले दबी है।

GST काउंसिल 7 अक्टूबर, 2026 को होने वाली अपनी बैठक में एक अहम नीतिगत बदलाव पर विचार करने वाली है, जिससे कॉरपोरेट जगत को बड़ी टैक्स राहत मिल सकती है। चर्चा का मुख्य केंद्र यह है कि क्या कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए लिए गए ग्रुप लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने की अनुमति दी जाए।\n\nवर्तमान में, इन इंश्योरेंस प्रीमियम पर 18% GST लगता है। मौजूदा नियमों के तहत, कंपनियां इस टैक्स का क्रेडिट क्लेम नहीं कर पाती हैं, जिसका मतलब है कि यह पूरा 18% उनके लिए सीधे तौर पर एक अतिरिक्त खर्च बन जाता है। GST काउंसिल की लॉ कमिटी ने कथित तौर पर CGST एक्ट की धारा 17(5) में संशोधन की सिफारिश की है, ताकि इस क्रेडिट को खोला जा सके। साथ ही, आउटडोर कैटरिंग जैसे अन्य बिजनेस खर्चों पर भी राहत की उम्मीद है।\n\n### कंपनियों पर क्या होगा असर?\n\nकंपनियों के लिए वर्तमान प्रतिबंधों के कारण व्यापक कर्मचारी बीमा प्रदान करना महंगा हो जाता है। यदि काउंसिल इस बदलाव को मंजूरी देती है, तो बिजनेस इस 18% GST को अपनी आउटपुट टैक्स देनदारी के खिलाफ एडजस्ट कर पाएंगे। यह बदलाव कर्मचारी लाभों की शुद्ध लागत को प्रभावी ढंग से कम कर सकता है, जिससे कंपनियों को स्वास्थ्य और जीवन बीमा कवरेज का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। इंश्योरेंस सेक्टर के लिए यह एक बड़ा बूस्टर साबित हो सकता है।\n\n### रेगुलेटरी आउटलुक और जोखिम\n\nनिवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह प्रस्ताव अभी केवल विचार-विमर्श के चरण में है। अंतिम निर्णय GST काउंसिल का होगा, जो टैक्स राहत और सरकारी राजस्व संग्रह के बीच संतुलन बनाएगी। यदि सहमति बनती भी है, तो CGST एक्ट में औपचारिक विधायी संशोधन की प्रक्रिया में समय लगेगा। सरकार ने ऐतिहासिक रूप से ITC के विस्तार को लेकर सावधानी बरती है। निवेशकों को 7 अक्टूबर की बैठक के बाद आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए, विशेष रूप से इस बात पर कि सरकार राजस्व प्रभाव को प्रबंधित करने के लिए कौन सी शर्तें लागू करती है।

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