GST Council की बैठक **7 अक्टूबर** को होने जा रही है, जिसमें टैक्स कानूनों को सरल बनाने पर चर्चा होगी। सरकार लीगल एक्शन की लिमिट को **₹10 करोड़** तक बढ़ाने और गिरफ्तारी के प्रावधानों में ढील देने पर विचार कर रही है।
नियम बदलने के पीछे का मकसद
7 अक्टूबर को होने वाली GST Council की बैठक का मुख्य एजेंडा 'Ease of Doing Business' को बढ़ावा देना है। सरकार उन पुरानी शिकायतों को दूर करना चाहती है जहां टैक्सपेयर्स टैक्स अधिकारियों की सख्त कार्रवाई से डरते हैं।
क्या-क्या बड़े बदलाव हो सकते हैं?
- Prosecution Limit: फिलहाल ₹5 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसे बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने का प्रस्ताव है, ताकि छोटे मामलों में व्यापारी सुरक्षित महसूस करें।
- सजा में कटौती: जिन मामलों में टैक्स की चोरी ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ के बीच है, उनमें अधिकतम जेल की सजा 3 साल से घटाकर 2 साल की जा सकती है।
- जुडिशियल पावर: सरकार चाहती है कि कोर्ट को ज्यादा अधिकार मिलें, ताकि सजा तय करते समय जुर्माना या जेल में से कोई एक या दोनों का विकल्प चुना जा सके।
गिरफ्तारी का मुद्दा
सबसे बड़ा विवाद अधिकारियों के पास मौजूद 'अरेस्ट पावर' को लेकर है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिजिटल दौर में जब हर चीज ऑनलाइन है, तो प्रशासनिक गिरफ्तारियों की जरूरत कम है। अगर यह फैसला लिया जाता है, तो फ्रॉड के मामलों को सीधे Bharatiya Nyaya Sanhita के तहत कानूनी प्रक्रिया से निपटाया जाएगा।
हालांकि, कुछ अधिकारी इसे टैक्स चोरी रोकने के लिए एक जरूरी हथियार मानते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या काउंसिल के सभी सदस्य इन बदलावों पर एक राय बना पाते हैं या नहीं। मार्केट की नजर इस मीटिंग के नतीजों पर टिकी है, जो देश के कारोबारी माहौल को नई दिशा दे सकते हैं।
