GST Council की 57वीं बैठक अब 7 अक्टूबर 2026 को होगी। इस बार काउंसिल का मुख्य फोकस टैक्स दरों में बदलाव के बजाय 'GST 2.0' के तहत प्रशासनिक सुधारों पर रहेगा, जो कंपनियों की वर्किंग कैपिटल के लिए अहम है।
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक अब 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होगी। पहले यह बैठक 12 सितंबर को होनी थी, लेकिन भारत में होने वाले BRICS लीडर्स समिट के कारण इसे आगे बढ़ा दिया गया है। बैठक के एजेंडे को अंतिम रूप देने के लिए 5 और 6 अक्टूबर को सरकारी अधिकारियों की तैयारी बैठकें होंगी।
करीब एक साल के अंतराल के बाद हो रही यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि काउंसिल अब टैक्स रेट्स के बजाय 'GST 2.0' फ्रेमवर्क पर फोकस कर रही है। इसका मकसद पूरी टैक्स प्रणाली को आधुनिक और सरल बनाना है।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी हैं ये सुधार?
कॉर्पोरेट इंडिया के लिए टैक्स रेट्स से कहीं ज्यादा जरूरी ये प्रशासनिक बदलाव हैं। अक्सर कंपनियों का बड़ा पैसा और समय इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) विवादों और रिफंड प्रक्रिया में फंस जाता है। काउंसिल का ध्यान अब रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने और विवादों को कम करने पर है। अगर ये प्रक्रियाएं सुधरती हैं, तो मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी सेक्टर्स की वर्किंग कैपिटल में सुधार होगा, जिससे कंपनियां अपनी ग्रोथ पर बेहतर ध्यान दे सकेंगी।
अनुपालन (Compliance) और चुनौतियां
निवेशकों की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि सरकार फर्जी ITC दावों और पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों को कैसे सुलझाती है। अगर काउंसिल इन पर स्पष्ट और सरल नियम लाती है, तो कंपनियों का अनुपालन बोझ कम होगा और कानूनी जोखिमों में कमी आएगी। हालांकि, यदि तकनीकी मोर्चे पर स्पष्टता नहीं मिलती है, तो हाई-कॉम्प्लायंस कंपनियों के लिए वर्किंग कैपिटल का रिस्क बना रह सकता है। अब सभी की निगाहें बैठक के बाद आने वाले आधिकारिक फैसलों और इन सुधारों की समय-सीमा पर टिकी हैं।
