वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में Financial Stability and Development Council (FSDC) की 30वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और वित्तीय जोखिमों को मैनेज करने पर खास जोर दिया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को नई दिल्ली में FSDC की 30वीं बैठक की कमान संभाली। इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में भारतीय वित्तीय बाजार के सभी बड़े रेगुलेटर्स शामिल हुए, जिनमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), सेबी (SEBI), IRDAI और PFRDA के प्रमुख मौजूद रहे।
FSDC का मकसद
साल 2010 में स्थापित FSDC एक सर्वोच्च संस्था है, जिसका काम वित्तीय स्थिरता बनाए रखना और विभिन्न रेगुलेटर्स के बीच आपसी तालमेल बिठाना है। यह प्लेटफॉर्म अलग-अलग सेक्टरों के बीच पॉलिसी में एकरूपता लाता है, ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान अर्थव्यवस्था की सेहत दुरुस्त रहे।
डिजिटल सुरक्षा पर फोकस
इस बैठक में साइबर सिक्योरिटी सबसे अहम मुद्दा रहा। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और CERT-In के अधिकारियों की भागीदारी ने साफ कर दिया कि सरकार अब बैंकिंग, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और इंश्योरेंस कंपनियों के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सख्त है। साइबर हमलों के बढ़ते खतरों को देखते हुए अब ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट पर सरकार का फोकस बढ़ गया है।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
निवेशकों को इन मीटिंग्स के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि ये भविष्य में आने वाले बड़े पॉलिसी बदलावों का संकेत देते हैं। जब FSDC डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता देती है, तो इसका सीधा असर बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के लिए नए साइबर सिक्योरिटी गाइडलाइंस और कड़े ऑडिट स्टैंडर्ड्स के रूप में देखने को मिलता है। आने वाले समय में RBI और SEBI की ओर से डेटा प्रोटेक्शन और टेक्नोलॉजी से जुड़े नए सर्कुलर जारी हो सकते हैं, जो आपकी निवेश की सुरक्षा को और मजबूत करेंगे।
