FIEO और RBI: रेपो रेट **5.50%** होने के बाद एक्सपोर्टर्स की बड़ी मांग, क्रेडिट समय सीमा बढ़ाने की अपील

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
FIEO और RBI: रेपो रेट **5.50%** होने के बाद एक्सपोर्टर्स की बड़ी मांग, क्रेडिट समय सीमा बढ़ाने की अपील

Federation of Indian Export Organizations (FIEO) ने Reserve Bank of India (RBI) से एक्सपोर्ट क्रेडिट की समय सीमा **270** दिन से बढ़ाकर **450** दिन करने की मांग की है। रेपो रेट में **25** बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी के बाद यह कदम MSME एक्सपोर्टर्स को राहत देने के लिए उठाया गया है।

राहत क्यों है जरूरी?

RBI द्वारा रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% किए जाने के तुरंत बाद, FIEO ने रेगुलेटरी सपोर्ट की गुहार लगाई है। एक्सपोर्टर्स का कहना है कि मौजूदा 270 दिनों की क्रेडिट सीमा अब नाकाफी साबित हो रही है। सप्लाई चेन की बाधाओं, एनर्जी प्राइस में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण माल की आवाजाही में अधिक समय लग रहा है, जिससे वर्किंग कैपिटल साइकिल पर बुरा असर पड़ा है।

मार्जिन पर दबाव

टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और प्रोसेस्ड एग्रीकल्चर जैसे सेक्टर में मार्जिन पहले ही बहुत कम है। रेपो रेट बढ़ने से कर्ज महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ रहा है। अगर क्रेडिट अवधि नहीं बढ़ाई गई, तो एक्सपोर्ट कंपनियों की लागत और बढ़ेगी, जिससे ग्लोबल मार्केट में भारतीय सामान की प्रतिस्पर्धी क्षमता (price-competitiveness) कमजोर हो सकती है।

पुरानी मिसाल

यह कोई नई मांग नहीं है। इससे पहले भी RBI ने महामारी के समय राहत देते हुए 30 जून 2026 तक के लिए क्रेडिट टाइमलाइन बढ़ाई थी। FIEO अब उसी तरह की राहत को फिर से लागू करने की मांग कर रहा है ताकि अस्थिर ग्लोबल माहौल में एक्सपोर्टर्स को लिक्विडिटी का सहारा मिल सके।

निवेशकों के लिए संकेत

बाजार के लिए यह देखना सबसे अहम होगा कि RBI इस पर क्या फैसला लेता है। अगर राहत मिलती है, तो एक्सपोर्ट ओरिएंटेड कंपनियों के कैश फ्लो में सुधार होगा। वहीं, राहत न मिलने पर आने वाली तिमाहियों में इन कंपनियों के ब्याज खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव देखने को मिल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.