EPFO ने 'Employees’ Enrolment Campaign 2026' की शुरुआत की है। इसके जरिए कंपनियां अप्रैल 2009 से मार्च 2026 के बीच छूटे हुए कर्मचारियों को पीएफ दायरे में ला सकती हैं और कर्मचारी का शेयर माफ करने का फायदा भी पा सकती हैं।
इस कैंपेन का मकसद क्या है?
EPFO ने उन कंपनियों के लिए एक राहत भरा मौका दिया है, जिन्होंने अतीत में अपने कर्मचारियों को पीएफ दायरे से बाहर रखा था। 'Employees’ Enrolment Campaign' (EEC) 2026 के जरिए कंपनियां 31 अक्टूबर 2026 तक वॉलेंटरी तरीके से इन कर्मचारियों को सोशल सिक्योरिटी नेट में शामिल कर सकती हैं। यह सुविधा 1 अप्रैल 2009 से लेकर 31 मार्च 2026 के बीच की अवधि के लिए लागू है।
कंपनियों को क्या फायदा होगा?
इस कैंपेन का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यदि कंपनी ने कर्मचारी की सैलरी से पीएफ का हिस्सा नहीं काटा था, तो उसे कर्मचारी का पिछला हिस्सा नहीं भरना होगा। कंपनी को केवल अपना हिस्सा, उचित ब्याज (Interest) और एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज जमा करना होगा। इसके अलावा, प्रति संस्थान केवल ₹100 का मामूली डैमेज शुल्क देना होगा।
आवेदन की प्रक्रिया और शर्तें
इसके लिए कंपनियों को EPFO के आधिकारिक 'Employer Portal' पर जाना होगा। रजिस्ट्रेशन के लिए 'Face Authentication' का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) आसानी से जेनरेट हो सके।
खास बात यह है कि यदि कंपनी ने कर्मचारी का पीएफ काटा था लेकिन उसे जमा नहीं किया, तो उन्हें पूरा पैसा (ब्याज सहित) चुकाना होगा। साथ ही, यह लाभ केवल उन कर्मचारियों के लिए है जो अभी कंपनी के रोल पर कार्यरत हैं।
'VISHWAS 2026' से भ्रमित न हों
कंपनियों को यह याद रखना चाहिए कि यह कैंपेन अलग है और 'VISHWAS 2026' स्कीम से बिल्कुल अलग काम करता है। 'VISHWAS 2026' का इस्तेमाल उन मामलों में किया जाता है जहां पीएफ योगदान में देरी हुई थी और उस पर डैमेज पेनल्टी लगी थी। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि दोनों का इस्तेमाल सही तरीके से करना आपकी देनदारियों को कम कर सकता है। समय सीमा 31 अक्टूबर 2026 है, इसके बाद कंपनियां कठोर पेनल्टी की जद में आ सकती हैं।
