EPFO एमनेस्टी स्कीम 2026: प्रॉविडेंट फंड ट्रस्ट को मिली बड़ी राहत, अब ₹5 लाख तक ऑटो-सेटलमेंट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
EPFO एमनेस्टी स्कीम 2026: प्रॉविडेंट फंड ट्रस्ट को मिली बड़ी राहत, अब ₹5 लाख तक ऑटो-सेटलमेंट

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने एग्ज़ेम्प्टेड प्रॉविडेंट फंड (PF) ट्रस्ट्स के लिए एक खास एमनेस्टी स्कीम (Amnesty Scheme) शुरू की है। यह स्कीम 6 महीने के लिए, यानी दिसंबर 2026 तक चलेगी। इसके ज़रिए कंपनियां अपनी पुरानी कंप्लायंस (Compliance) की गड़बड़ियों को ठीक कर सकती हैं और पुराने मुकदमों से बच सकती हैं। साथ ही, कर्मचारियों के लिए PF क्लेम सेटलमेंट की ऑटो-लिमिट भी ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है।

क्यों ख़ास है यह स्कीम?

EPFO ने 'एम्नेस्टी स्कीम, 2026' नाम से यह एक बार की स्कीम लाई है, जो उन एस्टैब्लिशमेंट्स (Establishments) की मदद करेगी जिनके पास एग्ज़ेम्प्टेड प्रॉविडेंट फंड (PF) ट्रस्ट हैं और उन्हें अपनी कंप्लायंस रिकॉर्ड्स को सुधारना है। यह स्कीम 29 जून 2026 से शुरू होकर अगले 6 महीनों तक खुली रहेगी।

यह कदम फाइनेंस एक्ट, 2026 में हुए बदलावों के कारण उठाया गया है। नए नियमों के अनुसार, प्रॉविडेंट फंड्स को इनकम टैक्स (Income Tax) में खास पहचान के लिए EPF & MP एक्ट, 1952 की धारा 17 के तहत ऑफिशियल एग्ज़ेम्प्शन (Exemption) लेना ज़रूरी है। पहले कई ट्रस्ट बिना इस सरकारी एग्ज़ेम्प्शन के भी इनकम टैक्स की पहचान के साथ काम कर रहे थे। इस स्कीम के ज़रिए कंपनियां अपनी ट्रस्ट बनने की तारीख से ही रेट्रोस्पेक्टिव एग्ज़ेम्प्शन (Retrospective Exemption) ले सकती हैं, जिससे पुरानी एडमिनिस्ट्रेटिव (Administrative) दिक्कतें खत्म हो जाएंगी। सरकार ने इस स्कीम के लिए सामान्य अड़चनें जैसे मिनिमम कर्मचारी संख्या, कॉर्पस (Corpus) की ज़रूरतें और 3 साल की पिछली कंप्लायंस की अनिवार्यता को हटा दिया है।

जो कंपनियां इस स्कीम में हिस्सा लेंगी, उनके PF ड्यूज (Dues), इंटरेस्ट (Interest) और डैमेजेज़ (Damages) के पुराने असेसमेंट्स (Assessments) वापस ले लिए जाएंगे, बशर्ते वे यह साबित कर सकें कि कर्मचारियों को लगातार स्टैच्यूटरी (Statutory) या उससे ज़्यादा का कंट्रीब्यूशन (Contribution) मिलता रहा है। यह कई कंपनियों को EPFO के साथ लंबे समय से चल रहे लीगल डिस्प्यूट्स (Legal Disputes) को बिना किसी पेनल्टी (Penalty) के सुलझाने का मौका देगा।

डिजिटल पोर्टल और क्लेम सेटलमेंट

इस एमनेस्टी के साथ ही, EPFO ने अपने मेंबर रिकॉर्ड्स को सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस (Centralised Database) पर माइग्रेट (Migrate) करने का काम भी पूरा कर लिया है। इस इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) बदलाव का मकसद ऑपरेशंस (Operations) को स्ट्रीमलाइन (Streamline) करना और मैन्युअल प्रोसेसिंग (Manual Processing) को कम करना है।

कर्मचारियों के लिए एक बड़ा अपडेट यह है कि PF क्लेम्स के लिए ऑटो-सेटलमेंट की लिमिट को बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया गया है, जो पहले ₹1 लाख थी।

नए पोर्टल में ऑटोमेटेड प्री-वैलिडेशन (Automated Pre-validation) की सुविधा भी है, जो मेंबर्स को एप्लीकेशन सबमिट करने से पहले ही किसी भी गलती के बारे में अलर्ट कर देती है। इसका मकसद क्लेम्स के रिजेक्शन रेट (Rejection Rate) को कम करना है। हालांकि, सेंट्रलाइज्ड पेमेंट आर्किटेक्चर (Centralised Payment Architecture) से सेटलमेंट तेज़ होने की उम्मीद है, EPFO ने यह भी संकेत दिया है कि शुरुआती हफ्तों में सिस्टम के फाइनल स्टेबिलाइजेशन (Stabilisation) और एडिशनल वेरिफिकेशन (Verification) चेक्स के दौरान यूजर्स को मामूली देरी का सामना करना पड़ सकता है।

निवेशकों और कंपनी मैनेजमेंट के लिए मुख्य बात यह है कि यह एमनेस्टी उनकी संस्थाओं के लिए पेंडिंग लिटिगेशन (Litigation) को कितना कम कर पाती है और नया सेंट्रलाइज्ड पोर्टल बढ़ते क्लेम्स को कितनी आसानी से हैंडल करता है। जिन कंपनियों को पहले कंप्लायंस इश्यूज (Issues) या टैक्स स्टेटस (Tax Status) की पहचान को लेकर दिक्कतें आई थीं, उन्हें दिसंबर 2026 की फाइलिंग डेडलाइन्स (Deadlines) पर नज़र रखनी चाहिए ताकि वे सरकार द्वारा दी जा रही इस 'क्लीन स्लेट' (Clean Slate) का पूरा फायदा उठा सकें।

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