Crude Oil: कच्चे तेल के दाम $94 पर आए, RBI की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव हुआ कम

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Crude Oil: कच्चे तेल के दाम $94 पर आए, RBI की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव हुआ कम

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें गिरकर **$94** प्रति बैरल के करीब आ गई हैं, जिससे भारत के लिए इंपोर्टेड इन्फ्लेशन का खतरा घट गया है। इसका सीधा असर रिजर्व बैंक (RBI) की दिसंबर पॉलिसी पर पड़ेगा, जहां अब आक्रामक रेट हाइक की उम्मीदें कम हो गई हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भारतीय मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल को बड़ी राहत दी है। 5 नवंबर, 2026 तक एनर्जी की लागत में कमी ने घरेलू मार्केट में पॉजिटिव सेंटिमेंट पैदा किया है, जिससे Sensex और Nifty जैसी इंडेक्स में तेजी देखी जा रही है। एनर्जी कीमतों में यह नरमी अर्थव्यवस्था के लिए एक स्टेबलाइजर (stabilizer) की तरह काम कर रही है, जिससे आयात (imports) सस्ते हो रहे हैं और भारतीय रुपये पर दबाव भी कम हो रहा है।

RBI की पॉलिसी पर असर

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा संकेत रिजर्व बैंक के मॉनेटरी पॉलिसी अप्रोच में बदलाव है। अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद, डर था कि तेल की बढ़ती कीमतें RBI को और भी आक्रामक रेट हाइक करने पर मजबूर कर देंगी। लेकिन अब बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अब दरें 25 बेसिस पॉइंट्स के दायरे में ही बढ़ाई जाएंगी, न कि बहुत ज्यादा सख्ती की जाएगी।

अभी भी हैं चुनौतियां

भले ही तेल की कीमतें कम हुई हैं, लेकिन RBI के लिए चुनौती खत्म नहीं हुई है। घरेलू फूड इन्फ्लेशन अब भी 6% के करीब बनी हुई है, जो ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज से स्वतंत्र है। इसी वजह से, बैंक अपनी टाइटनिंग साइकिल को पूरी तरह रोकने के मूड में नहीं है, क्योंकि वे रियल इंटरेस्ट रेट को पॉजिटिव रखना चाहते हैं।

आगे की राह

बाजार के जानकारों ने अब टर्मिनल रेट (terminal rate) का अनुमान 6.75% से घटाकर 6% से 6.25% के बीच कर दिया है। दिसंबर की पॉलिसी मीटिंग अब रुपये की स्थिरता और वेस्ट एशिया में चल रहे जियोपॉलिटिकल हालातों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को सलाह है कि वे महंगाई के आंकड़ों और RBI के कमेंट्री पर कड़ी नजर रखें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.