RBI के नियमों से बचने के लिए कॉर्पोरेट ग्रुप्स की बड़ी चाल, बैलेंस शीट में हो रहे बदलाव

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI के नियमों से बचने के लिए कॉर्पोरेट ग्रुप्स की बड़ी चाल, बैलेंस शीट में हो रहे बदलाव

कई भारतीय कॉर्पोरेट ग्रुप्स RBI के रेगुलेटरी दायरे से बाहर रहने के लिए अपनी बैलेंस शीट को बदल रहे हैं। ये कंपनियां NBFC और CIC के कड़े नियमों और अनुपालन (Compliance) से बचने के लिए अपने रेवेन्यू और एसेट स्ट्रक्चर को नया रूप दे रही हैं।

भारत के बड़े कॉर्पोरेट घराने अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की निगरानी से बचने के लिए अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव कर रहे हैं। इस कवायद का मुख्य लक्ष्य RBI का 'प्रिंसिपल बिजनेस टेस्ट' (Principal Business Test) पास करना है। नियमों के मुताबिक, अगर किसी कंपनी के 50% से ज्यादा एसेट वित्तीय हैं और कुल आय का 50% से ज्यादा हिस्सा वित्तीय गतिविधियों से आता है, तो उसे अनिवार्य रूप से NBFC के रूप में रजिस्टर होना पड़ता है।

कैसे बच रही हैं कंपनियां?

कंपनियां इस दायरे से बचने के लिए कई तरीके अपना रही हैं:

  • नॉन-फाइनेंशियल रेवेन्यू बढ़ाना: कंपनियां कम मार्जिन वाली कमोडिटी ट्रेडिंग का वॉल्यूम बढ़ा रही हैं ताकि उनकी गैर-वित्तीय आय का हिस्सा बना रहे।
  • एसेट मिक्स में बदलाव: कंपनियां फिजिकल रियल एस्टेट में निवेश बढ़ा रही हैं ताकि उनके वित्तीय निवेश कुल एसेट के 50% की सीमा को पार न करें।

क्यों डर रही हैं कंपनियां?

NBFC या CIC के रूप में रजिस्ट्रेशन का मतलब है—कड़े कैपिटल बफर, रिस्क ऑफिसर्स की नियुक्ति और एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट के जटिल नियम। इसके अलावा, रेगुलेटरी प्रोसेस में नया निवेश करने की आजादी भी कम हो जाती है। इसीलिए प्रमोटर 'ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी' को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ऑडिटर्स की सख्ती और निवेशकों के लिए चिंता

अब ऑडिटर्स के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे सर्टिफाई करें कि कंपनी NBFC की परिभाषा में आती है या नहीं। खास तौर पर ₹1,000 करोड़ से ज्यादा एसेट वाली बड़ी कंपनियां अब प्राइवेट ट्रस्ट या LLP जैसे स्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर रही हैं।

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता 'ट्रांसपेरेंसी' की है। जब कंपनियां वित्तीय इकाई के रूप में रजिस्टर नहीं होतीं, तो वे अपने ग्रुप लेवल के कर्ज (Leverage) और इंटर-कंपनी लोन की जानकारी उतनी स्पष्टता से नहीं देतीं। ऐसे में निवेशकों को यह ध्यान रखने की जरूरत है कि कहीं ये जटिल स्ट्रक्चर कंपनी के असली फाइनेंशियल रिस्क को छिपा तो नहीं रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.