CVC 2025 Audit: सरकारी संस्थानों में बढ़ी धांधली, Banks और Railways पर सबसे ज्यादा सवाल

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AuthorMehul Desai|Published at:
CVC 2025 Audit: सरकारी संस्थानों में बढ़ी धांधली, Banks और Railways पर सबसे ज्यादा सवाल

सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) की 2025 की रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। सरकारी संस्थाओं के खिलाफ कुल **70,584** शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें बैंकिंग और रेलवे सेक्टर सबसे ऊपर हैं।

सेक्टर-वार शिकायतों का ब्यौरा

रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों को कुल 9,933 शिकायतें मिलीं, जबकि इंडियन रेलवे के खिलाफ 9,381 मामले दर्ज किए गए। राहत की बात यह है कि रेजोल्यूशन रेट (Resolution Rate) काफी बेहतर रहा है। बैंकों ने 9,520 मामलों का निपटारा किया, वहीं रेलवे ने 8,754 शिकायतें सुलझा ली हैं। हालांकि, निवेशकों के लिए चिंता का विषय वो पेंडिंग केस हैं जो तय समय सीमा में नहीं निपटाए जा सके।

निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?

CVC इन मामलों को 3 महीने की समय सीमा में निपटाने का लक्ष्य रखता है, लेकिन इस बार 2,002 ऐसे केस हैं जो इस विंडो को पार कर गए हैं। कुल पेंडिंग मामलों की संख्या 5,679 है। सरकारी कंपनियों (PSUs) में निवेश करने वालों के लिए यह एक संकेत है कि इन संस्थानों में इंटरनल कंट्रोल और गवर्नेंस पर कितना दबाव है। अधिक पेंडिंग शिकायतें भविष्य में नियामक (Regulatory) सख्ती का कारण बन सकती हैं, जो ऑपरेशनल दक्षता को प्रभावित कर सकता है।

आगे क्या होगा?

यह ऑडिट भले ही फाइनेंशियल रिजल्ट न हो, लेकिन यह मैनेजमेंट की जवाबदेही को दर्शाता है। जो निवेशक पीएसयू (PSUs) शेयरों में पैसा लगाते हैं, उन्हें इन संस्थाओं के रिस्पॉन्स पर नजर रखनी चाहिए कि कैसे वे इस पेंडिंग शिकायतों के बैकलॉग को कम करते हैं। कंपनी का गवर्नेंस ही लंबी अवधि में उसकी वैल्यू तय करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.