CBDT ने नोटिफिकेशन नंबर **2** ऑफ **2026** जारी करते हुए RTA (Registrar and Share Transfer Agents) के लिए नई रिपोर्टिंग गाइडलाइन्स लागू कर दी हैं। अब RTAs को म्यूचुअल फंड ट्रांजेक्शन की जानकारी छमाही आधार पर सीधे टैक्स विभाग को देनी होगी, जिससे कैपिटल गेन्स की जानकारी ऑटोमैटिकली आपके टैक्स रिटर्न में प्री-फिल हो सकेगी।
अब कैसे काम करेगा सिस्टम?
टैक्स विभाग का मकसद कैपिटल गेन्स, इनकम और नुकसान की कैलकुलेशन को स्टैंडर्ड बनाना है। इसके लिए RTAs को अब एक खास फॉर्मेट, जिसे SFT-2518 नाम दिया गया है, के तहत सुरक्षित सर्वर पर डेटा अपलोड करना होगा। यह पूरी जानकारी आपके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में ऑटो-अपडेट हो जाएगी, जिससे निवेशकों का काम काफी आसान हो जाएगा।
कंपनियों पर असर और जवाबदेही
यह नियम निवेशकों के लिए तो फायदेमंद है, लेकिन CAMS और KFinTech जैसी बड़ी कंपनियों के लिए ऑपरेशनल चुनौतियां बढ़ा रहा है। अब हर फाइलिंग के साथ RTA के एक डायरेक्टर द्वारा सत्यापित 'कंट्रोल स्टेटमेंट' देना अनिवार्य है। इसका मतलब है कि डेटा में किसी भी तरह की चूक होने पर कंपनी को सीधे रेगुलेटरी एक्शन का सामना करना पड़ सकता है। इसके चलते इन कंपनियों को अपनी टेक-सिस्टम और कंप्लायंस टीम पर खर्च बढ़ाना पड़ सकता है।
डेडलाइन और कैलकुलेशन का नया फॉर्मूला
CBDT ने रिपोर्टिंग के लिए सख्त समय सीमा तय की है:
- 30 सितंबर तक की अवधि के लिए रिपोर्ट 31 अक्टूबर तक जमा करनी होगी।
- 31 मार्च तक की अवधि के लिए रिपोर्ट 30 अप्रैल तक फाइल करना होगा।
साथ ही, कैपिटल गेन्स की गणना के लिए 'फर्स्ट-इन-फर्स्ट-आउट' (FIFO) मेथड को अनिवार्य कर दिया गया है। यानी आपके पोर्टफोलियो के जो शेयर सबसे पहले खरीदे गए थे, उन्हीं को सबसे पहले बेचा हुआ माना जाएगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि सरकार की ओर से डेटा प्री-फिल किया जाएगा, लेकिन निवेशकों को सावधानी बरतनी होगी। अगर RTA के सिस्टम में डेटा मैपिंग की गलती होती है, तो आपके टैक्स स्टेटमेंट में गलत जानकारी दिख सकती है। टैक्स भरने से पहले अपने रिकॉर्ड्स और प्री-फिल्ड डेटा का मिलान जरूर करें। एक्सपर्ट्स की नजर इस बात पर है कि क्या इन कंपनियों का बढ़ता कंप्लायंस खर्च आने वाली तिमाहियों में इनके प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित करेगा या नहीं।
