CBDT ने सरकारी सिक्योरिटीज़ (Gov Sec) पर टैक्स छूट का दावा करने के लिए नया 'Form 173A' अनिवार्य कर दिया है। अब निवेशकों को अपने निवेश और ट्रांजेक्शन का विस्तृत ब्यौरा देना होगा, ताकि टैक्स वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जा सके।
सरकारी सिक्योरिटीज़ में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए CBDT ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। 'Income-tax (Seventh Amendment) Rules, 2026' के तहत अब टैक्स छूट पाने के लिए Form 173A भरना जरूरी होगा। यह बदलाव 'Income-tax Act, 2025' के प्रावधानों के तहत छूट को वेरिफाई करने के लिए लाया गया है।
फाइलिंग के लिए विस्तृत जानकारी
इस नए फॉर्म में निवेशकों को सिर्फ बेसिक डिटेल्स (जैसे PAN) ही नहीं, बल्कि SEBI रजिस्ट्रेशन की जानकारी भी देनी होगी। इसके अलावा, निवेशकों को 1 अप्रैल से 31 मार्च के बीच की अपनी होल्डिंग्स का पूरा रिकॉन्सिलिएशन डेटा पेश करना होगा। इसमें सिक्योरिटी का प्रकार, टेन्योर और हर एसेट का ISIN नंबर बताना अनिवार्य है। यह नियम ट्रेजरी बिल, फिक्स्ड-रेट बॉन्ड्स, फ्लोटिंग-रेट बॉन्ड्स और स्टेट डेवलपमेंट लोन्स (SDLs) जैसे सभी इंस्ट्रूमेंट्स पर लागू होगा।
निवेशकों पर असर
CBDT का यह कदम टैक्स चोरी रोकने और डेटा की सटीकता बढ़ाने के लिए उठाया गया है। अब टैक्स छूट का दावा करना पहले से अधिक कठिन और प्रक्रियात्मक हो गया है। निवेशकों को सलाह है कि वे अपने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सिस्टम को अपडेट करें ताकि हर साल फाइलिंग के समय सटीक रिपोर्ट जनरेट की जा सके। किसी भी तरह की गलती या अधूरी जानकारी न केवल आपकी छूट को खतरे में डाल सकती है, बल्कि टैक्स नियमों के तहत पेनल्टी का कारण भी बन सकती है।
