Banks और RBI: ₹1 लाख करोड़ के फंसे ट्रेड ट्रांजेक्शन पर बड़ा फैसला, एक्सपोर्टर्स को मिलेगी राहत

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AuthorMehul Desai|Published at:
Banks और RBI: ₹1 लाख करोड़ के फंसे ट्रेड ट्रांजेक्शन पर बड़ा फैसला, एक्सपोर्टर्स को मिलेगी राहत

भारतीय बैंक अब RBI से पुरानी ट्रेड दिक्कतों को सुलझाने की अनुमति मांग रहे हैं। करीब **₹1 लाख करोड़** के ट्रांजेक्शन मिसमैच को **1 अक्टूबर 2026** से लागू होने वाले नए नियमों के तहत निपटाने की तैयारी है, ताकि एक्सपोर्टर्स को 'कॉशन लिस्ट' (Caution List) में जाने से बचाया जा सके।

देश के बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बीच पुरानी ट्रेड फाइलों को लेकर मंथन चल रहा है। पिछले एक दशक से लंबित ₹1 लाख करोड़ के अनसुलझे क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन को लेकर बैंकों ने रेगुलेटर से विशेष अनुमति मांगी है। बैंक चाहते हैं कि वे आगामी 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाले नए नियमों का इस्तेमाल इन पुराने मामलों को निपटाने के लिए कर सकें।

क्यों है यह समस्या?

वर्तमान में इन पुराने लेनदेन को सुलझाने की प्रक्रिया बेहद जटिल है। बैंकों को हर मामले के लिए आरबीआई की मंजूरी लेनी पड़ती है, जो मैन्युअल होने के कारण काफी समय लेती है। कई मामलों में तो डॉक्यूमेंट्स गायब हैं या संबंधित कंपनियां बंद हो चुकी हैं, जिससे यह डेटा दशकों से सिस्टम में अटका पड़ा है।

एक्सपोर्टर्स पर क्या है असर?

अगर ये ट्रेड फाइलें समय रहते क्लियर नहीं होती हैं, तो आरबीआई एक्सपोर्टर्स को अपनी 'कॉशन लिस्ट' में डाल देता है। इस लिस्ट में आने के बाद कारोबारी गतिविधियों पर कड़ी पाबंदियां लग जाती हैं, जिससे व्यापार करना मुश्किल हो जाता है।

आगे क्या होगा?

RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने इस मसले पर बैंक प्रमुखों के साथ एक बैठक बुलाई है। चर्चा का मुख्य केंद्र यह है कि क्या बैंकों को छोटी एंट्रीज को राइट-ऑफ करने या क्लाइंट के डिक्लेरेशन के आधार पर पेमेंट वैलिडेट करने की छूट दी जा सकती है। अगर आरबीआई इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो बैंकिंग सिस्टम का बोझ काफी कम हो जाएगा और ट्रेड फाइनेंसिंग की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.