रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया नीलामी में 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कुल **₹16,900 करोड़** जुटाए हैं। इस नीलामी में निवेशकों की भारी डिमांड देखी गई और बोलियां उम्मीद से **3 गुना** से ज्यादा रहीं, जो राज्य सरकारों की उधारी लागत का अहम संकेत है।
बाजार की मजबूती का संकेत
रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा आयोजित स्टेट गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (SGS) की नीलामी में संस्थागत निवेशकों ने काफी दिलचस्पी दिखाई है। इस नीलामी का बिड-टू-कवर रेश्यो लगभग 3.3 गुना रहा, जिसका मतलब है कि कुल ₹55,046 करोड़ की बोलियां प्राप्त हुईं। यह सरकारी बॉन्ड्स के प्रति बाजार के भरोसे को दर्शाता है, जो बैंकों के लिए SLR (Statutory Liquidity Ratio) बनाए रखने में भी मददगार होते हैं।
किसने कितना लिया कर्ज?
इस दौर में महाराष्ट्र सबसे बड़ा कर्जदार बनकर उभरा, जिसने विभिन्न सिक्योरिटीज के जरिए ₹5,600 करोड़ जुटाए। वहीं, आंध्र प्रदेश ने ₹3,800 करोड़ का फंड इकट्ठा किया। इनके अलावा गुजरात, पंजाब और राजस्थान ने ₹2,000 करोड़ प्रत्येक जुटाए, जबकि शेष राशि जम्मू-कश्मीर, मेघालय और गोवा से आई।
यील्ड (Yield) पर निवेशकों की नजर
नीलामी में कट-ऑफ यील्ड 7.5% से 7.8% के बीच रही। पंजाब के 2043 वाले बॉन्ड पर यील्ड सबसे अधिक करीब 7.8% दर्ज की गई, जो लंबी अवधि के कर्ज को लेकर बाजार के बदलते मिजाज को दिखाती है।
निवेशकों के लिए ये आंकड़े राज्यों की फिस्कल हेल्थ का बैरोमीटर हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्लोबल ब्याज दरों में अस्थिरता और लिक्विडिटी मैनेजमेंट का सीधा असर इन बॉन्ड्स पर पड़ता है। आने वाले समय में आरबीआई के ऑक्शन कैलेंडर पर नजर रखना फिक्स्ड-इनकम निवेशकों के लिए बेहद जरूरी होगा।
