Union Cabinet इन दिनों रेलवे के नॉन-गैजेटेड कर्मचारियों के लिए प्रोडक्टिविटी-लिंक्ड बोनस (PLB) पर विचार कर रही है। कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि 10 साल पुराने वेज सीलिंग को बढ़ाया जाए, जिससे बोनस की राशि **₹17,951** से बढ़कर ज्यादा हो सके। इस बीच, रेलवे बोर्ड ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फर्जी सर्कुलर को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
बोनस कैलकुलेशन और यूनियन की मांग
फिलहाल रेलवे कर्मचारियों के लिए बोनस की गणना ₹7,000 की वेज सीलिंग के आधार पर होती है, जो 2014-15 फाइनेंशियल ईयर से लागू है। इस पुरानी व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को 78 दिनों का बोनस मिलता है, जो ₹17,951 बैठता है।
हालांकि, इंडियन रेलवेज टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) सहित कई कर्मचारी संगठन लंबे समय से इसमें बदलाव की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि महंगाई के दौर में यह सीमा बेहद कम है। यूनियनों ने वेज सीलिंग को बढ़ाकर ₹18,000 करने का प्रस्ताव रखा है। अगर सरकार इसे मंजूरी देती है, तो हर कर्मचारी को मिलने वाला बोनस बढ़कर करीब ₹46,184 तक पहुंच सकता है। अब अंतिम फैसला यूनियन कैबिनेट के हाथ में है कि वह वित्तीय बोझ और कर्मचारियों की मांग के बीच कैसे संतुलन बनाती है।
वायरल सर्कुलर और सच्चाई
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक फर्जी डॉक्यूमेंट तेजी से फैला, जिसमें दावा किया गया था कि सरकार ने ₹41,149 के बोनस को मंजूरी दे दी है। रेलवे बोर्ड ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे फर्जी करार दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी आदेश आधिकारिक वेबसाइट और रेल मंत्रालय के जरिए ही जारी किया जाता है। कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे ऐसी अफवाहों पर भरोसा न करें।
14 अक्टूबर 2026 तक सरकार की ओर से बोनस को लेकर कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। अब सभी की नजरें कैबिनेट की अगली बैठक पर टिकी हैं।
