Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ढालवाला में **10 किलोमीटर** लंबी एस्केप टनल का काम पूरा हो गया है। प्रोजेक्ट **78%** पूरा हो चुका है, लेकिन निवेशकों के लिए शेयर की सुस्त चाल और मार्जिन का दबाव अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है।
प्रोजेक्ट की रफ्तार और इंजीनियरिंग का कमाल
125 किलोमीटर लंबे ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल कॉरिडोर के लिए यह एक बड़ा इंजीनियरिंग मील का पत्थर है। कुल 28 प्रस्तावित सुरंगों में से अब 22 सुरंगों का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। हिमालय के कठिन रास्तों पर चल रहा यह प्रोजेक्ट 78% तक पूरा हो चुका है और इसका लक्ष्य दिसंबर 2029 तक इसे पूरी तरह से चालू करने का है। इस निर्माण कार्य में TBM (Tunnel Boring Machines) और NATM जैसी एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही, प्रोजेक्ट में 19 बड़े पुल भी बनाए जा रहे हैं।
स्टॉक का हाल और निवेशकों की चिंता
एक तरफ जहां प्रोजेक्ट साइट पर काम तेजी से चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार में RVNL का प्रदर्शन निवेशकों को निराश कर रहा है। 11 सितंबर 2026 को कंपनी का शेयर ₹204.90 पर बंद हुआ, जो इसके 52-वीक हाई यानी ₹400.70 से काफी नीचे है। पिछले एक साल में शेयर ने लगभग -38.65% का निगेटिव रिटर्न दिया है।
फाइनेंशियल फ्रंट पर कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है। इसके अलावा, वर्किंग कैपिटल साइकिल में खिंचाव (elongation) और 'डेटर डेज' (debtor days) बढ़ने से कंपनी की लिक्विडिटी पर भी असर पड़ रहा है, जिसे लेकर मार्केट एक्सपर्ट्स सतर्क हैं।
भविष्य की राह और जोखिम
पहाड़ी इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भौगोलिक चुनौतियां सबसे बड़ा जोखिम होती हैं। मिट्टी और चट्टानों की अनिश्चितता के कारण प्रोजेक्ट में देरी और लागत बढ़ने का डर बना रहता है। कंपनी के सामने फिलहाल लंबी अवधि के फिक्स्ड प्राइस कॉन्ट्रैक्ट्स के बीच मुनाफे को बनाए रखने की चुनौती है। अब निवेशकों की नजरें बाकी बची 6 सुरंगों के काम और फाइनल कमिशनिंग शेड्यूल पर टिकी हैं।
