Northeast Frontier Railway (NFR) ने साल 2026 के पहले नौ महीनों में AI और साउंड-आधारित तकनीक के जरिए **255** संभावित ट्रेन हादसों को रोका है। यह तकनीक न केवल वन्यजीवों को बचा रही है, बल्कि रेल संचालन में आने वाली बाधाओं को भी कम कर रही है।
भारतीय रेलवे का अहम हिस्सा, Northeast Frontier Railway (NFR) ने जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 255 ऐसे मौकों पर हादसे रोके हैं, जहां हाथी और ट्रेन के टकराने की पूरी संभावना थी। यह उपलब्धि अलीपुरद्वार, लुमडिंग, तिनसुकिया और रंगिया डिवीजनों जैसे संवेदनशील इलाकों में आधुनिक तकनीक के सफल इस्तेमाल को दर्शाती है।
तकनीक से सुरक्षा का नया अध्याय
रेलवे ने अपनी सुरक्षा रणनीति में एक मल्टी-लेयर्ड अप्रोच अपनाई है। इसमें सबसे खास है AI-आधारित Intrusion Detection System (IDS), जो 'डिस्ट्रिब्यूटेड एकॉस्टिक सिस्टम' (DAS) तकनीक पर काम करता है। यह सिस्टम पटरियों के पास किसी भी बड़ी हलचल को भांपते ही कंट्रोल रूम को रियल-टाइम अलर्ट भेज देता है। इससे ट्रेन की स्पीड कम करने का समय मिल जाता है और इमरजेंसी ब्रेक लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे ट्रेनों की टाइमिंग और मेंटेनेंस पर बुरा असर नहीं पड़ता।
'Plan Bee' का अनूठा प्रयोग
AI के साथ-साथ रेलवे 'Plan Bee' सिस्टम का भी इस्तेमाल कर रही है। यह एक ऐसी ध्वनि आधारित तकनीक है जो मधुमक्खियों के भिनभिनाने की आवाज निकालती है। हाथियों को यह आवाज बिल्कुल पसंद नहीं आती और वे पटरियों से दूर रहते हैं। इसके अलावा, वन्यजीवों के लिए अंडरपास बनाने और कचरा प्रबंधन (waste management) के कड़े नियमों ने भी हादसों को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई है।
रेलवे की कार्यक्षमता पर असर
हाथियों और ट्रेनों के टकराव को रोकने का सीधा असर भारतीय रेलवे की लॉजिस्टिक्स क्षमता पर पड़ा है। दुर्घटनाओं और इमरजेंसी ब्रेक से होने वाली देरी अब काफी कम हो गई है, जिससे माल ढुलाई (freight logistics) की गति बढ़ी है और रोलिंग स्टॉक को होने वाले नुकसान में भी कमी आई है। जैसे-जैसे रेलवे अपनी सुरक्षा प्रणालियों को और अधिक आधुनिक बना रही है, यह मॉडल दूसरे हाई-डेंसिटी वाले वन्यजीव गलियारों (wildlife corridors) के लिए एक केस स्टडी बन गया है।
