भारत की पहली हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का बजट अब **₹1.1 लाख करोड़** से लगभग दोगुना होकर **₹2.1 लाख करोड़** पहुंच गया है। जमीन अधिग्रहण में देरी और प्रोक्योरमेंट चुनौतियों के चलते प्रोजेक्ट अब **2030** तक पूरा होगा, हालांकि पहला फेज **2027** में शुरू करने का लक्ष्य है।
बजट में बड़ा इजाफा और कारण
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए सरकार ने अपना नया फाइनेंशियल ब्लूप्रिंट 25 अगस्त, 2026 को यूनियन कैबिनेट के सामने रखा है। इस मेगा प्रोजेक्ट की लागत में करीब ₹1 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है। लागत बढ़ने की मुख्य वजह महाराष्ट्र में जमीन अधिग्रहण में हुई देरी और प्रोक्योरमेंट (Procurement) संबंधी अड़चनें हैं। रेलवे बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, इन चुनौतियों और महंगाई की मार के कारण प्रोजेक्ट की लागत में 83% का उछाल आया है।
नई डेडलाइन और ऑपरेशनल प्लान
पूरे 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के 2030 तक पूरा होने का अनुमान है। हालांकि, काम को चरणों में बांटा गया है ताकि जल्द से जल्द सुविधा शुरू हो सके। इसका पहला लेग, जो सूरत और बिलिमोरा को जोड़ेगा, अगस्त 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है। अब सरकार हाई-स्पीड ट्रेन सेट के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दे रही है। प्रत्येक ट्रेन सेट की अनुमानित लागत ₹390 करोड़ से ₹400 करोड़ के बीच तय की गई है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।
फंडिंग का गणित
शुरुआत में यह प्रोजेक्ट जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी की वित्तीय सहायता पर आधारित था, लेकिन लागत में भारी बढ़ोतरी के कारण अब केंद्र सरकार को अपनी तरफ से बजटरी सपोर्ट और सोवरेन कैपिटल कमिटमेंट बढ़ाना होगा। अब निवेशकों और आम जनता की नजर इस बात पर है कि क्या एजेंसियां 2027 और 2030 के तय लक्ष्यों को बिना किसी और लागत बढ़ोतरी के पूरा कर पाती हैं या नहीं।
