1 अक्टूबर से रेलवे बोर्ड ने मंगलुरु के **30 किलोमीटर** लंबे रेल सेक्शन को Southern Railway से हटाकर South Western Railway (Mysuru डिविजन) को सौंपने का फैसला किया है। इस कदम का लक्ष्य New Mangalore Port पर माल ढुलाई और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग को बेहतर बनाना है।
एडमिनिस्ट्रेटिव बदलाव के पीछे की वजह
रेलवे बोर्ड ने मंगलुरु के 30 किलोमीटर रेल नेटवर्क को Palakkad डिविजन से Mysuru डिविजन में शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। यह एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव है, जिसका मकसद कोस्टल कर्नाटक क्षेत्र में रेलवे ऑपरेशंस को एक ही ज़ोन के तहत लाना है। अभी तक यह नेटवर्क Konkan Railway Corporation समेत तीन अलग-अलग निकायों में बंटा था, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्रेट मैनेजमेंट से जुड़े फैसले लेने में काफी देरी होती थी।
फ्रेट रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा
आंकड़ों पर गौर करें तो, मंगलुरु रीजन अकेले ही Palakkad डिविजन के कुल फ्रेट रेवेन्यू का लगभग 90% हिस्सा जेनरेट करता है। बावजूद इसके, स्थानीय उद्योगों की लंबे समय से शिकायत थी कि फ्रेट वॉल्यूम के अनुपात में यहां इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश नहीं हो रहा था। 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के दौरान Palakkad डिविजन ने 7 मिलियन टन से अधिक माल संभाला था। अब Mysuru डिविजन के आने से रेक (Rake) की उपलब्धता और तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड की उम्मीद जगी है।
असली चुनौती: पश्चिमी घाट (Western Ghats)
प्रशासनिक बदलाव एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन चुनौतियां अभी बरकरार हैं। पश्चिमी घाट से गुजरने वाली रेल लाइन की सीमित कैपेसिटी माल ढुलाई की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। ट्रेड बॉडीज का मानना है कि केवल जूरिडिक्शन बदलने से काम नहीं चलेगा, इसके लिए लाइन को डबल करने जैसे ठोस कदम उठाने होंगे। निवेशकों और पोर्ट यूजर्स की नजर अब इस बात पर है कि क्या नया मैनेजमेंट मेंटेनेंस और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को रफ्तार दे पाएगा या नहीं।
