Kinet Railway Solutions के बहुप्रतीक्षित Vande Bharat स्लीपर ट्रेन के प्रोटोटाइप का रोलआउट अब मार्च 2027 तक टल गया है। **₹14,400 करोड़** के इस बड़े प्रोजेक्ट में तकनीकी मंजूरी की समस्याओं के चलते निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
प्रोजेक्ट में क्यों आई रुकावट?
Kinet Railway Solutions, जो कि Rail Vikas Nigam Ltd (RVNL) के साथ एक जॉइंट वेंचर है, ने स्लीपर ट्रेन के प्रोटोटाइप की डिलीवरी डेट आगे बढ़ा दी है। यह पूरा प्रोजेक्ट ₹14,400 करोड़ का है, जिसमें कुल 120 ट्रेनसेट्स की मैन्युफैक्चरिंग और लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस शामिल है। देरी की मुख्य वजह तकनीकी स्पेसिफिकेशन्स का फाइनल न हो पाना है। रेलवे अथॉरिटीज ने ब्रेकिंग सिस्टम, ट्रैक्शन मोटर्स और इंटरनल कॉन्फिगरेशन जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों पर कड़े सवाल उठाए हैं।
जॉइंट वेंचर का गणित
इस वेंचर में रूस की Transmashholding (TMH) की 70%, RVNL की 25% और Locomotive Electronic Systems की 5% हिस्सेदारी है। हालांकि बेसिक डिजाइन अप्रूव हो चुका है, लेकिन तकनीकी अड़चनों के चलते 16-कोच वाले पहले प्रोटोटाइप का निर्माण कार्य अभी रुका हुआ है। इंडियन रेलवे ने साफ कर दिया है कि वे अब टाइमलाइन या तकनीकी मानकों के साथ और रियायत देने के मूड में नहीं हैं।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
इस डील में पेनल्टी क्लॉज भी शामिल हैं, जिसका मतलब है कि मार्च 2027 की नई डेडलाइन चूकने पर जॉइंट वेंचर को भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। कुल 1,920 कोच के ऑर्डर के भविष्य पर अब अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। आने वाले समय में निवेशकों को एक्सचेंज फाइलिंग्स पर नजर रखनी चाहिए, जिससे पता चल सके कि तकनीकी मंजूरी और मैन्युफैक्चरिंग की स्थिति में क्या सुधार हो रहा है।
