केरल हाई कोर्ट ने Indian Railways को Nilambur-Nanjangud रेल प्रोजेक्ट का Detailed Project Report (DPR) तैयार करने के लिए **14 अक्टूबर** की आखिरी तारीख दे दी है। इस आदेश से प्रोजेक्ट की पेंडिंग स्थिति और पर्यावरणीय बाधाओं पर स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
हाई कोर्ट की सख्ती
केरल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस Soumen Sen और जस्टिस Syam Kumar V.M. की बेंच ने Indian Railways को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि 14 अक्टूबर तक हलफनामा दायर कर यह बताया जाए कि क्या DPR को अंतिम रूप दिया गया है और इसे मंजूरी के लिए संबंधित अथॉरिटीज के पास भेजा गया है या नहीं। यह कदम मालाबार क्षेत्र में लंबे समय से लंबित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने के लिए उठाया गया है।
प्रोजेक्ट के सामने बड़ी चुनौतियां
Nilambur-Nanjangud रेल लिंक, जिसे 'Wayanad Railway' या 'Golden IT Corridor' के नाम से भी जाना जाता है, दशकों से चर्चा में है। हालांकि, यह प्रोजेक्ट अब भी प्लानिंग और सर्वे के दौर से आगे नहीं बढ़ पाया है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:
- पर्यावरणीय बाधाएं: प्रस्तावित रूट का Bandipur Tiger Reserve से होकर गुजरना सबसे बड़ी चुनौती है। इको-सेंसिटिव जोन होने के कारण यहां पर्यावरणीय मंजूरी मिलना एक जटिल प्रक्रिया है।
- अंतर-राज्य समन्वय: केरल और कर्नाटक के बीच भूमि अधिग्रहण और प्रोजेक्ट की लागत साझा करने को लेकर तालमेल की कमी एक बड़ी रुकावट रही है।
- वित्तीय व्यवहार्यता: चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थिति और निर्माण की उच्च लागत के चलते इस प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यावहार्यता पर भी लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या?
Railway Board पर अब स्पष्टता देने का दबाव बढ़ गया है। हालांकि यह कोई कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट नहीं है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में रुचि रखने वाले निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है। आने वाला हलफनामा यह तय करेगा कि प्रोजेक्ट अगले चरण में बढ़ेगा या अभी भी इसे नियामक और पर्यावरणीय बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।
