मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का बजट अब लगभग दोगुना होकर **₹2.1 लाख करोड़** हो गया है। भूमि अधिग्रहण में देरी और लॉजिस्टिकल चुनौतियों के कारण लागत में भारी उछाल आया है, और अब इस प्रोजेक्ट के **2030** तक पूरा होने का अनुमान है।
भारत के फ्लैगशिप इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में बड़ा वित्तीय बदलाव देखने को मिला है। 2017 में इसकी शुरुआती लागत ₹1.1 लाख करोड़ आंकी गई थी, जो अब बढ़कर लगभग ₹2.1 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। इस नए बजट प्रस्ताव पर फिलहाल कैबिनेट की समीक्षा चल रही है।\n\n### लागत क्यों बढ़ी?\n\nइस भारी-भरकम बजट में बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण की धीमी रफ्तार और जापान से विशेष उपकरणों को मंगवाने में आ रही लॉजिस्टिकल दिक्कतें हैं। ठाणे क्रीक के पास बनने वाली 7 किलोमीटर लंबी अंडरसी टनल (समुद्र के नीचे सुरंग) जैसी जटिल इंजीनियरिंग चुनौतियों ने भी काम की लागत और समय दोनों को बढ़ा दिया है।\n\n### प्रोजेक्ट की नई डेडलाइन\n\nचुनौतियों के बावजूद, सरकार ने नई समयसीमा तय की है। सूरत और बिलिमोरा के बीच का पहला फेज अगस्त 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है, जबकि पूरा कॉरिडोर 2030 तक बनकर तैयार होने की संभावना है।\n\n### स्वदेशी तकनीक पर जोर\n\nप्रोजेक्ट में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव यह है कि भारत अब पूरी तरह जापान की शिंकानसेन तकनीक पर निर्भर नहीं रहेगा। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने BEML लिमिटेड को ₹866.87 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। इसके तहत BEML 'B-28' नाम के दो प्रोटोटाइप हाई-स्पीड ट्रेनसेट तैयार कर रही है, जो 280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार दौड़ सकेंगे। इन्हें खास तौर पर भारत की भीषण गर्मी और धूल भरे माहौल के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है।\n\nभविष्य की बात करें, तो सरकार बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे रूटों को जोड़ने के लिए 7 और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर काम करने की योजना बना रही है, जो भविष्य में एक बड़े रेल नेटवर्क की नींव रखेंगे।
