भारतीय रेलवे अगले 5 सालों में हर साल **4,000-5,000 किलोमीटर** ट्रैक बिछाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इस बड़ी योजना का मकसद नेटवर्क की भीड़ कम करना और बढ़ती माल ढुलाई की मांग को पूरा करना है।
Detailed Coverage
रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना
भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की है। इसके तहत, अगले पांच वर्षों में हर साल 4,000 से 5,000 किलोमीटर नई रेल लाइनों को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना से 514 मंजूर प्रोजेक्ट्स का backlog क्लियर होगा, जो करीब 40,000 किलोमीटर में फैले हैं। अभी 27,000 किलोमीटर से ज्यादा का काम विभिन्न चरणों में चल रहा है।
नेटवर्क की भारी कंजेशन से मिलेगी राहत
आज रेलवे के कई मुख्य रूट्स अपनी डिजाइन क्षमता से 150% से 180% तक ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं। इस भारी कंजेशन के कारण पैसेंजर ट्रेनों और मालगाड़ियों, दोनों की आवाजाही में देरी होती है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी बाधा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रेलवे देश की कुल माल ढुलाई का लगभग 24% संभालता है। लाइनों को डबल करके और व्यस्ततम रूटों पर तीसरी या चौथी लाइनें बिछाकर, सरकार माल परिवहन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।
प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की रणनीति
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में होने वाली आम देरी से बचने के लिए, रेलवे बोर्ड नई लाइनों के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के तरीके में बदलाव कर रहा है। अब प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही जमीन अधिग्रहण (land acquisition) और जरूरी पर्यावरण (environmental) व वन (forest) संबंधी मंजूरी जैसे महत्वपूर्ण कामों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस तरीके से प्रोजेक्ट मंजूर होने और उसे चालू करने के बीच का समय कम करने का लक्ष्य है।
प्राइवेट सेक्टर की भूमिका का विस्तार
इतने बड़े पैमाने पर प्रोग्राम को फंड करने और पूरा करने के लिए प्राइवेट प्लेयर्स का बड़ा सहयोग जरूरी है। इंडियन रेलवेज लोकोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स टर्मिनल के विकास जैसे क्षेत्रों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) को गहरा करने पर विचार कर रहा है। हाल के रुझानों से पता चलता है कि टर्मिनल इंफ्रास्ट्रक्चर में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट लगभग ₹8,000 करोड़ तक पहुंच गया है, जिससे काफी रेवेन्यू जनरेट हुआ है। प्राइवेट इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनियों के लिए यह एक स्थिर, लॉन्ग-टर्म ऑर्डर्स का पाइपलाइन प्रदान करता है, हालांकि प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करना ही मुख्य फोकस रहेगा।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें (Investor Monitorables)
निवेशकों के लिए, इस योजना की सफलता सरकार के लगातार कैपिटल स्पेंडिंग (capital spending) और प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। जहां कंजेशन कम करने का यह कदम लॉजिस्टिक्स लागत और माल ढुलाई की दक्षता के लिए सकारात्मक है, वहीं स्टील और सीमेंट जैसी कच्ची सामग्रियों की बढ़ती कीमतें, साथ ही कुछ क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण में संभावित बाधाएं, प्रोजेक्ट में देरी या लागत वृद्धि के मुख्य कारक बने रह सकते हैं। निवेशक यह जानने के लिए कि क्या 5,000 किमी का महत्वाकांक्षी वार्षिक लक्ष्य समय पर पूरा हो रहा है, भविष्य की तिमाही अपडेट्स में इन 514 प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर नजर रख सकते हैं।
