Indian Railways अब अपने माल ढुलाई नेटवर्क को स्मार्ट बनाने के लिए आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रही है। इस डिजिटल बदलाव का लक्ष्य वैगन की सेहत को ट्रैक करना और रोड ट्रांसपोर्ट से मार्केट शेयर वापस छीनना है।
भारतीय रेलवे अब पारंपरिक और मैनुअल मेंटेनेंस मॉडल को पीछे छोड़कर पूरी तरह से डेटा-संचालित (Data-driven) सिस्टम की ओर बढ़ रही है। रेलवे ने Machine Vision Inspection Systems (MVIS) और अन्य AI तकनीकों को तैनात करना शुरू कर दिया है, जो चलते हुए ट्रेन के वैगनों में किसी भी खराबी या ढीले पुर्जों को तुरंत पहचान सकते हैं। इससे मैनुअल चेकिंग की जरूरत काफी कम हो जाएगी।
टेक-ड्रिवेन मेंटेनेंस (Tech-Driven Maintenance)
इस आधुनिकीकरण के केंद्र में Project DRISHTI है, जिसे IIT Guwahati के सहयोग से तैयार किया गया है। इसके अलावा, पूरे नेटवर्क में 24 Wheel Impact Load Detectors (WILD) और 25 Online Monitoring of Rolling Stock (OMRS) सिस्टम लगाए गए हैं। ये उपकरण वैगनों के थर्मल पैटर्न और टूट-फूट को ट्रैक करते हैं, जिससे खराबी आने से पहले ही उसे ठीक करना मुमकिन हो गया है।
लक्ष्य: माल ढुलाई हिस्सेदारी बढ़ाना
रेलवे का लक्ष्य अगले 5 से 10 वर्षों में फ्रेट ट्रांसपोर्ट में अपनी हिस्सेदारी को 40% तक पहुँचाना है। अभी माल ढुलाई का एक बड़ा हिस्सा रोड ट्रांसपोर्ट के पास है। इसी दिशा में 'Madad' पोर्टल भी लॉन्च किया गया है, ताकि ग्राहकों को लोडिंग और अनलोडिंग से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान मिल सके।
चुनौतियां और वित्तीय जोखिम
इतनी बड़ी तकनीकी छलांग के बावजूद रेलवे के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। रेलवे का ऑपरेटिंग मार्जिन काफी पतला है और Indian Railway Finance Corporation (IRFC) पर कर्ज का दबाव बना हुआ है। पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अत्याधुनिक AI प्रोटोकॉल को जोड़ना एक कठिन काम है, जिसमें लागत बढ़ने का डर बना हुआ है। इसके अलावा, डिजिटल सिस्टम पर निर्भरता साइबर सुरक्षा के नए जोखिम भी पैदा करती है, जिन्हें रेलवे को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
