रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऐलान किया है कि अगले 3 से 4 वर्षों में भारत Vande Bharat ट्रेनों का निर्यात शुरू कर देगा। इसके लिए अब देश में 'स्टैंडर्ड-गेज' (Standard-Gauge) मॉडल तैयार किए जा रहे हैं, जो ग्लोबल रेलवे मानकों पर खरे उतरेंगे।
ग्लोबल मार्केट में भारत की एंट्री
रेलवे सेक्टर में भारत एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कन्फर्म किया है कि भारत 2026 तक Vande Bharat ट्रेनों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने के लिए तैयार है। यह कदम भारत की औद्योगिक क्षमता को दुनिया के सामने पेश करने का एक बड़ा जरिया बनेगा।
तकनीकी बदलाव: ब्रॉड-गेज से स्टैंडर्ड-गेज की ओर
भारत में अभी रेलवे ट्रैक का ढांचा 'ब्रॉड-गेज' है, जबकि दुनिया के ज्यादातर देशों में 'स्टैंडर्ड-गेज' चलता है। इस तकनीकी बाधा को पार करने के लिए RITES Ltd. फिलहाल इन ट्रेनों को ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से डिजाइन कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इस प्रोजेक्ट का सीधा असर रेलवे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम से जुड़ी कंपनियों पर पड़ेगा। BEML, Titagarh Rail Systems और Integral Coach Factory (ICF) जैसे बड़े नाम इस मैन्युफैक्चरिंग चैन के अहम हिस्से हैं। साथ ही, Wabtec जैसी वैश्विक तकनीक कंपनियों की भागीदारी भी इसमें देखी जा रही है।
चुनौतियां और अवसर
- सर्टिफिकेशन: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेफ्टी और ऑपरेशनल क्लीयरेंस हासिल करना एक लंबी और कठिन प्रक्रिया है।
- मेंटेनेंस: ग्लोबल रेल डील अक्सर 35 साल तक के लंबे मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट्स के साथ आती हैं, जो कंपनियों के फाइनेंशियल मॉडल को प्रभावित कर सकती हैं।
- कंपटीशन: यूरोप और एशिया की स्थापित दिग्गजों के साथ प्राइस और टेक्नोलॉजी में मुकाबला करना भारत के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
निवेशकों को अब इन कंपनियों के 'प्रोटोटाइप टेस्टिंग' और अंतरराष्ट्रीय टेंडर जीतने की खबरों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
