IRCTC ने अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को अपग्रेड करना शुरू कर दिया है। नई क्षमता से प्रति मिनट **1,50,000** टिकट बुक हो सकेंगे, लेकिन कंपनी फिलहाल मार्जिन दबाव और रेगुलेटरी जुर्माने जैसी चुनौतियों से भी जूझ रही है।
हाई-टेक सिस्टम की ओर बढ़ते कदम
भारतीय रेलवे ने अपने टिकट रिजर्वेशन सिस्टम को पूरी तरह हाई-टेक बना दिया है। पुरानी क्षमता जहाँ सिर्फ 32,000 टिकट प्रति मिनट की थी, वहीं अब नया सिस्टम 1,50,000 टिकट प्रति मिनट की रफ्तार पकड़ेगा। अगस्त 2026 से शुरू हुई इस माइग्रेशन प्रक्रिया का मकसद है- तत्कल बुकिंग के दौरान आने वाली तकनीकी रुकावटों और सर्वर क्रैश की समस्या को पूरी तरह खत्म करना।
खास बात यह है कि कंपनी अब 'क्लाउड-इनेबल्ड' फ्रेमवर्क पर शिफ्ट हो रही है और सिकंदराबाद में एक 'एक्टिव-एक्टिव डिजास्टर रिकवरी' साइट भी बनाई गई है। इससे किसी भी टेक्निकल फॉल्ट की स्थिति में बुकिंग पर असर नहीं पड़ेगा।
फाइनेंशियल हेल्थ और चुनौतियां
इस अपग्रेड के साथ ही निवेशकों की नजर कंपनी के नतीजों पर भी है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹330.16 करोड़ रहा, जिसमें पिछले साल के मुकाबले थोड़ी गिरावट देखी गई है। हालांकि, कंपनी अब भी कर्ज-मुक्त (debt-free) है और 30 जून, 2026 तक इसके पास ₹3,112 करोड़ का कैश रिजर्व मौजूद है।
केटरिंग सेगमेंट में बढ़ती लागत और बदलते रेवेन्यू मिक्स की वजह से कंपनी को फिलहाल प्रॉफिट मार्जिन के दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
रेगुलेटरी पचड़ों से जूझती IRCTC
ऑपरेशनल अपग्रेड्स के साथ कंपनी को रेगुलेटरी मोर्चे पर भी झटका लगा है। हाल ही में, बोर्ड कंपोजिशन से जुड़े SEBI के नियमों का पालन न करने पर NSE और BSE दोनों ने IRCTC पर ₹10.23 लाख का जुर्माना लगाया है। कंपनी का कहना है कि वे इस मामले को सुलझाने के लिए रेल मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
