सरकार ने दिल्ली से गुवाहाटी तक के लिए नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को हरी झंडी दे दी है। यह प्रोजेक्ट सरकार के ₹16 लाख करोड़ के हाई-स्पीड रेल ब्लूप्रिंट का हिस्सा है, जो पूरी तरह से 'मेक इन इंडिया' पर आधारित होगा।
प्रोजेक्ट की रूपरेखा
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की है कि दिल्ली से शुरू होकर यह कॉरिडोर आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों से गुजरेगा और अंत में पटना, सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक पहुंचेगा। इस हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का उद्देश्य उत्तरी भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा के समय को काफी कम करना है।
'मेक इन इंडिया' और बिजनेस पर असर
यह पूरा प्रोजेक्ट 'मेक इन इंडिया' फ्रेमवर्क के तहत तैयार किया जाएगा। इसमें स्टील गर्डर्स और स्ट्रक्चरल पिलर्स जैसे मुख्य उपकरणों का निर्माण स्थानीय स्तर पर होगा। देश भर में कुल सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए ₹16 लाख करोड़ का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा। यह खबर सीमेंट, स्टील, इंफ्रास्ट्रक्चर और ईपीसी (EPC) कंपनियों के लिए एक बड़े पॉजिटिव संकेत की तरह है, क्योंकि आने वाले समय में बड़े टेंडर निकलने की पूरी उम्मीद है।
निवेश के जोखिम (Execution Risks)
इतने बड़े पैमाने के प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) और कानूनी अड़चनें हमेशा से चिंता का विषय रही हैं, जिससे लागत बढ़ने का खतरा भी बना रहता है। साथ ही, रेलवे बजट पर भी इसका गहरा वित्तीय बोझ पड़ सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे टेंडर की खबरों, बजट आवंटन और काम की रफ्तार पर पैनी नजर रखें, क्योंकि प्रोजेक्ट की समयबद्धता ही इसकी सफलता की असली कुंजी होगी।
