सरकार ने सूरत और दनकुनी को जोड़ने वाले **2,052 किमी** लंबे ईस्ट-वेस्ट रेल कॉरिडोर का ऐलान किया है। इस **₹2.47 लाख करोड़** की भारी-भरकम लागत वाली योजना से लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल सेक्टर में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।
बड़े बुनियादी ढांचे पर सरकार का फोकस
रेल मंत्रालय ने देश में कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए इस विशाल प्रोजेक्ट का खाका तैयार किया है। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र के पश्चिमी इलाकों और नासिक को सीधे तौर पर नेशनल रेल नेटवर्क से जोड़ेगा। इसका मकसद माल ढुलाई और पैसेंजर ट्रेनों के लिए एक डेडिकेटेड रास्ता बनाना है, जिससे औद्योगिक विकास को नई गति मिल सके।
JNPT और लॉजिस्टिक्स में आएगा सुधार
इस कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) तक सामान की आवाजाही को सुगम बनाना है। मौजूदा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के साथ जुड़ने के बाद, उत्तर और मध्य भारत के लिए कार्गो मूवमेंट काफी तेज और सस्ता हो जाएगा। इससे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल एक्टिविटी को सीधा बूस्ट मिलेगा।
मुंबई लोकल का बदलेगा स्वरूप
लंबी दूरी की रेल के अलावा, मंत्रालय ने मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों के कायाकल्प की भी तैयारी कर ली है। 2030 तक 238 नई जनरेशन की एसी लोकल ट्रेनें पटरियों पर उतरेंगी, जिनकी शुरुआत 2027 से होने की उम्मीद है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) इन ट्रेनों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इन्फ्रास्ट्रक्चर के इस महायज्ञ का असर कैपिटल गुड्स, कंस्ट्रक्शन, सीमेंट और स्टील कंपनियों के ऑर्डर बुक पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है। हालांकि, निवेशकों को इस प्रोजेक्ट से जुड़े जोखिमों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जमीन अधिग्रहण की चुनौतियां और प्रोजेक्ट में देरी जैसी समस्याएं बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए हमेशा चिंता का विषय रहती हैं। बाजार की नजर अब टेंडर प्रक्रिया और काम शुरू होने की रफ्तार पर टिकी है।
