केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर भारत में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए एक बड़े प्लान का ऐलान किया है। सिलिगुड़ी से गुवाहाटी और शिलांग को जोड़ने वाले इस **630 किलोमीटर** लंबे हाइवे कॉरिडोर पर **₹61,500 करोड़** का निवेश किया जाएगा।
प्रोजेक्ट की मुख्य बातें
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने पूर्वोत्तर को मुख्यधारा की सप्लाई चेन से जोड़ने के लिए एक व्यापक खाका तैयार किया है। इस मेगा प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक ट्रेड रूट बनाना है। सबसे बड़ा हिस्सा सिलिगुड़ी और गुवाहाटी के बीच 400 किलोमीटर के स्ट्रेच का है, जिस पर ₹30,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
समय और दूरी में बड़ी कमी
- जोरबाट से बारापानी: यह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट दूरी को 100 किमी से घटाकर 66 किमी करेगा, जिससे सफर में 150 मिनट के बजाय सिर्फ 60 मिनट लगेंगे।
- शिलांग से सिलचर: इस 165 किमी के रूट से सफर का समय 8 घंटे से घटकर 4 घंटे होने की उम्मीद है। सरकार नवंबर तक इसके वर्क ऑर्डर जारी करने की प्रक्रिया शुरू करना चाहती है।
निवेशकों के लिए संकेत
इंफ्रास्ट्रक्चर और ईपीसी (EPC) कंपनियों के लिए यह बड़ी खबर है। इन प्रोजेक्ट्स से कंपनियों की ऑर्डर बुक में जबरदस्त विजिबिलिटी बढ़ सकती है, खासकर उन फर्मों के लिए जो पहाड़ी इलाकों में काम करने में माहिर हैं। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि इस क्षेत्र में काम करने के अपने रिस्क हैं, जैसे कठिन भौगोलिक स्थिति, पर्यावरण संबंधी मंजूरियां और भूमि अधिग्रहण में देरी।
कनेक्टिविटी का बड़ा जाल
यह प्रोजेक्ट सरकार की उस लंबी अवधि की पहल का हिस्सा है, जिसके तहत पूर्वोत्तर में नेशनल हाइवे कवरेज 2014 के 10,905 किमी से बढ़कर 2025 की शुरुआत तक 16,200 किमी से अधिक हो गया है। इसके साथ ही 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर के लिए रेलवे बजट में ₹10,440 करोड़ का आवंटन और उड़ान (UDAN) स्कीम के तहत एविएशन सेक्टर का विस्तार भी इस क्षेत्र को नई उड़ान दे रहा है।
