Delhi High Court ने IRCTC और रेल मंत्रालय को नोटिस जारी कर ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम के टेक्निकल ऑडिट की मांग पर जवाब मांगा है। पेमेंट फेलियर और अनुचित एक्सेस जैसी समस्याओं के चलते यह मामला कोर्ट पहुंचा है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑनलाइन रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली पर संज्ञान लेते हुए रेल मंत्रालय और IRCTC को नोटिस भेजा है। कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को 1 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस याचिका में प्लेटफॉर्म के व्यापक तकनीकी और प्रशासनिक ऑडिट की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला?
अधिवक्ता उत्तम कुमार द्वारा दायर इस याचिका में टिकट बुकिंग के दौरान आने वाली तकनीकी रुकावटों का जिक्र किया गया है। यूजर्स को अक्सर पेमेंट कटने के बाद भी टिकट बुक न होने और लॉग-इन फेलियर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, याचिका में थर्ड-पार्टी एजेंट्स द्वारा बॉट्स (Bots) के गलत इस्तेमाल और टिकटों के कोटा आवंटन में पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने ट्रांजैक्शन लॉग और ऑथेंटिकेशन रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की अपील की है ताकि सिस्टम की खामियों का पता लगाया जा सके।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
IRCTC का पूरा बिजनेस मॉडल उसके डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती पर टिका है। यदि कोर्ट इस ऑडिट के बाद सिस्टम में बड़े बदलाव या अपग्रेड का आदेश देती है, तो कंपनी को टेक्नोलॉजी, सर्वर कैपेसिटी और साइबर सिक्योरिटी पर अपना खर्च बढ़ाना पड़ सकता है।
मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को तय की गई है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मंत्रालय और IRCTC कोर्ट के सामने अपना पक्ष कैसे रखते हैं और क्या इसे केवल तकनीकी खराबी माना जाता है या फिर इसमें बड़े ढांचागत सुधारों की जरूरत महसूस की जाती है।
