Delhi-Guwahati Bullet Train: सरकार से मिली हरी झंडी, 'Chicken's Neck' पार करना होगा सबसे बड़ी चुनौती

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AuthorNeha Patil|Published at:
Delhi-Guwahati Bullet Train: सरकार से मिली हरी झंडी, 'Chicken's Neck' पार करना होगा सबसे बड़ी चुनौती

केंद्र सरकार ने दिल्ली से गुवाहाटी तक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से होकर गुजरेगा, लेकिन सिलीगुड़ी के पास 'Chicken's Neck' कॉरिडोर का हिस्सा इंजीनियरिंग के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भारत सरकार ने दिल्ली और गुवाहाटी को जोड़ने वाले महत्वाकांक्षी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। नवंबर 2026 तक, इस प्रोजेक्ट को 'अप्रूवल-इन-प्रिंसिपल' मिल चुका है, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से हाई-स्पीड नेटवर्क के जरिए जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह रूट दिल्ली से शुरू होकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से होता हुआ असम तक जाएगा।\n\n### 'Chicken's Neck' की इंजीनियरिंग चुनौती\n\nइस प्रोजेक्ट के सामने सबसे बड़ी बाधा सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे 'Chicken's Neck' भी कहा जाता है, को पार करना है। मात्र 16 से 22 किलोमीटर चौड़ा यह इलाका पूर्वोत्तर को मुख्य भारत से जोड़ता है। यहाँ की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा संवेदनशीलता को देखते हुए, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) को यहाँ पारंपरिक रेलवे के बजाय एलिवेटेड वायडक्ट्स या डीप टनल जैसे एडवांस इंजीनियरिंग समाधान अपनाने होंगे, ताकि मौजूदा लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा पर असर न पड़े।\n\n### निवेशकों के लिए मार्केट इम्पैक्ट\n\nभारतीय शेयर बाजार के नजरिए से, यह एक लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर कहानी है। हालांकि अभी तक कोई भी कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले समय में यह कंस्ट्रक्शन, हेवी इंजीनियरिंग, स्टील और सीमेंट सेक्टर की कंपनियों के लिए बड़े अवसरों का द्वार खोल सकता है। चूँकि इस प्रोजेक्ट के लिए मौजूदा पटरियों से अलग एक समर्पित ट्रैक की आवश्यकता होगी, इसलिए स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग फर्मों के लिए इसमें बड़ी संभावनाएं दिख रही हैं।\n\n### जोखिम और मॉनिटर करने वाली बातें\n\nइन्वेस्टर्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स में लैंड एक्विजिशन, टेक्निकल स्टडी और एग्जीक्यूशन में काफी समय लगता है। मुख्य जोखिमों में लागत का बढ़ना (Cost Overruns) और प्रोजेक्ट में देरी शामिल है। बाजार अब इस प्रोजेक्ट के डिटेल रूट अलाइनमेंट, फिजिबिलिटी स्टडी और शुरुआती टेंडर की घोषणाओं पर नजर रखेगा। निवेशकों को किसी भी तरह की जल्दबाजी के बजाय रेल मंत्रालय और संबंधित कॉर्पोरेशन की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.