केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (हैदराबाद-चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे) के लिए अभी तक किसी भी तरह का लैंड एक्विजिशन (Land Acquisition) अधिकृत नहीं किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि हैदराबाद से चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे को जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट्स अभी शुरुआती दौर में हैं। रेल मंत्रालय ने अभी तक जमीन अधिग्रहण के लिए कोई भी आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है।
अवैध गतिविधियों पर लगाम
हाल ही में हैदराबाद के बाहरी इलाकों में इन प्रोजेक्ट्स के नाम पर जमीन खरीद-फरोख्त की खबरें सामने आई थीं, जिसे सरकार ने पूरी तरह से 'अवैध' करार दिया है। मंत्री ने साफ कहा है कि फिलहाल रूट एलाइनमेंट (Route Alignment) का काम चल रहा है और राज्य सरकारों को जमीन खरीदने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स के लिए चिंता
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जमीन अधिग्रहण सबसे जटिल चरण होता है। यदि प्रक्रिया सही तरीके से न हो, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:
- Execution Risk: बिना फाइनल एलाइनमेंट के जमीन खरीदना प्रोजेक्ट में बड़ी देरी का कारण बन सकता है।
- Cost Overruns: अतीत में ऐसे मामलों में बजट में भारी बढ़ोतरी और सालों की देरी देखी गई है।
- अस्पष्टता: जब तक रूट फाइनल नहीं होता, तब तक कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए काम का पैमाना तय करना मुश्किल होता है।
आगे क्या?
सरकार का कहना है कि तकनीकी सर्वे और रूट एलाइनमेंट पूरा होने के बाद ही पूरी जानकारी राज्य सरकारों और किसानों के साथ साझा की जाएगी। भविष्य में इन प्रोजेक्ट्स की गति इस बात पर निर्भर करेगी कि एलाइनमेंट स्टडीज कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता के साथ पूरी होती हैं।
