Central Railway ने कल्याण और आसनगांव के बीच **32.23 किमी** लंबी चौथी रेल लाइन के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस मांगी है। इस प्रोजेक्ट पर **₹1,620 करोड़** की लागत आएगी, जिसे इंडियन रेलवे और महाराष्ट्र सरकार मिलकर पूरा करेंगी।
प्रोजेक्ट का उद्देश्य और विस्तार
मुंबई सबअर्बन नेटवर्क के सबसे व्यस्त रूटों में से एक, कल्याण से आसनगांव के बीच भारी भीड़ को कम करने के लिए रेलवे ने चौथी लाइन का खाका तैयार किया है। इस 32.23 किमी लंबे कॉरिडोर के लिए रेलवे ने वन विभाग से 6.5 हेक्टेयर फॉरेस्ट लैंड के डायवर्जन की मांग की है। इसके लिए 'परिवेश' पोर्टल पर आवेदन जमा कर दिया गया है।
इस नई लाइन का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लोकल ट्रेनों का ट्रैफिक लॉन्ग-डिस्टेंस और मालगाड़ियों से अलग हो जाएगा। इससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और यात्रियों के साथ-साथ कार्गो मूवमेंट में भी सुधार आएगा। यह रूट शाहद, अंबिवली, टिटवाला, खडावली और वसिंद जैसे महत्वपूर्ण सबअर्बन हब से होकर गुजरेगा।
फाइनेंशियल मॉडल और चुनौतियां
प्रोजेक्ट का खर्च 50:50 के अनुपात में इंडियन रेलवे और महाराष्ट्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि निवेशकों को प्रोजेक्ट की टाइमलाइन पर पैनी नजर रखनी चाहिए। मुंबई के पिछले कई प्रोजेक्ट्स में लैंड एक्विजिशन और एनवायरमेंटल क्लीयरेंस के चलते देरी देखी गई है, जो लागत को बढ़ा सकती है।
अगले चरण में फॉरेस्ट (कंजर्वेशन) एक्ट, 1980 के तहत मंजूरी मिलना सबसे महत्वपूर्ण है। जैसे ही ये क्लीयरेंस मिलेंगे, रेलवे बिडिंग और निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाएगा, जिससे नेटवर्क की क्षमता में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है।
