Central Railway ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली छमाही में स्क्रैप डिस्पोजल ड्राइव के जरिए **₹323.50 करोड़** की मोटी कमाई की है। यह पहल 'जीरो स्क्रैप मिशन' का हिस्सा है, जिससे न केवल रेलवे यार्ड्स खाली हो रहे हैं, बल्कि नॉन-फेयर रेवेन्यू में भी इजाफा हो रहा है।
कबाड़ से मोटी कमाई
Central Railway ने अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच ₹323.50 करोड़ की कमाई के साथ इंडियन रेलवे नेटवर्क में टॉप परफॉर्मिंग जोन का खिताब हासिल किया है। यह कमाई पुराने और बेकार हो चुके एसेट्स (assets) को हटाकर की गई है, जिससे रेलवे के यार्ड्स और वर्कशॉप्स में खाली जगह भी मिल गई है।
मिशन का असर और आंकड़े
यह ड्राइव 'जीरो स्क्रैप मिशन' और 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत चलाई गई है। इस छह महीने की अवधि में रेलवे ने लगभग 30,000 मीट्रिक टन परमानेंट-वे स्क्रैप और 1.72 लाख खराब हो चुके स्लीपर्स को निपटाया है। इसके अलावा 23 लोकोमोटिव, 62 कोच और 70 वैगन को लिक्विडेट किया गया है। इतना ही नहीं, ई-वेस्ट से भी रेलवे को ₹1.11 करोड़ की अतिरिक्त कमाई हुई है।
डिवीजन-वार प्रदर्शन
इस कमाई में भुसावल डिवीजन ₹57.27 करोड़ के साथ सबसे आगे रहा। मुंबई डिवीजन ने ₹52.08 करोड़, पुणे ने ₹47.55 करोड़, नागपुर ने ₹46.08 करोड़ और सोलापुर ने ₹14.69 करोड़ का योगदान दिया है।
चुनौतियां और भविष्य
रेलवे के लिए यह कमाई 'नॉन-फेयर रेवेन्यू' का बड़ा स्रोत है, जो टिकट और फ्रेट चार्जेस पर निर्भरता कम करती है। हालांकि, यह मॉडल पूरी तरह से मेटल की कीमतों (commodity prices) पर निर्भर है। यदि वैश्विक बाजार में धातु की कीमतें गिरती हैं, तो भविष्य की कमाई प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, स्क्रैप एक सीमित संसाधन है, इसलिए रेलवे को अब अपनी इन्वेंट्री मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स पर अधिक ध्यान देना होगा।
