कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने रेलवे के 8 बड़े मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स पर मुहर लगा दी है। कुल **₹20,804 करोड़** की इस योजना से माल ढुलाई क्षमता **74 मिलियन टन** बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 9 राज्यों में 1,196 किलोमीटर के रेल नेटवर्क को अपग्रेड किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य 2029-30 फाइनेंशियल ईयर तक इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करना है, ताकि कोयला, स्टील और पेट्रोलियम जैसे जरूरी सामानों की आवाजाही को तेज और किफायती बनाया जा सके।
पीएम गति शक्ति का हिस्सा
यह विस्तार PM Gati Shakti National Master Plan का एक प्रमुख हिस्सा है। हाई-ट्रैफिक रूटों पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाकर सरकार माल ढुलाई की रफ्तार बढ़ाना चाहती है, जिससे भारतीय उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक्स का खर्चा कम होगा।
निवेशकों के लिए रिस्क और फैक्टर्स
हालांकि यह निवेश बड़ा है, लेकिन इसके अमल (Execution) पर नजर रखना जरूरी है। मौजूदा व्यस्त रेल लाइनों पर काम करना (Brownfield expansion) एक चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग कार्य है, जिसमें लैंड एक्विजिशन और निर्माण के दौरान ट्रेनों का परिचालन बनाए रखना बड़ी चुनौती है। यदि स्टील और एनर्जी की कीमतें बढ़ती हैं, तो प्रोजेक्ट की लागत पर दबाव पड़ सकता है।
बाजार पर असर
पिछले दो सालों से रेलवे और इंजीनियरिंग सेक्टर काफी वोलेटाइल रहा है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि ये घोषणाएं कब ठोस ऑर्डर्स में बदलती हैं। आगामी महीनों में जारी होने वाले टेंडर्स और कॉन्ट्रैक्ट्स इस सेक्टर की भविष्य की रेवेन्यू विजिबिलिटी तय करेंगे।
