कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने दक्षिण भारत के लिए **₹10,021 करोड़** के 5 मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। **2030** तक पूरे होने वाले इस मिशन का मकसद दक्षिण के राज्यों में फ्रेट क्षमता बढ़ाना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने दक्षिण भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने का फैसला किया है। इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत 540 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी, जो तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों को आपस में जोड़ेंगी।\n\n### प्रोजेक्ट्स का मुख्य फोकस\nये प्रोजेक्ट्स 'PM Gati Shakti नेशनल मास्टर प्लान' का हिस्सा हैं। इसमें अरक्कोनम-रेनिगुंटा और व्हाइटफील्ड-बेंगारपेट रूट पर तीसरी और चौथी लाइन का काम शामिल है। साथ ही, होसुर-ओमल्लूर और सलेम-करूर-डिंडिगुल रूट का दोहरीकरण भी किया जाएगा।\n\n### इकोनॉमी पर असर\nरेलवे का यह विस्तार सालाना 47 मिलियन टन अतिरिक्त फ्रेट (माल ढुलाई) क्षमता जोड़ेगा, जिससे कोयला, स्टील, सीमेंट और फर्टिलाइजर उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि रोड से माल ढुलाई को रेल पर शिफ्ट करने से न केवल लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। इससे तिरुपति और यदागिरिगुट्टा जैसे धार्मिक स्थलों तक कनेक्टिविटी भी आसान होगी।\n\n### अन्य विकास और जोखिम\nसरकार ने इसी दिन एक और बड़ा फैसला लेते हुए पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए भी ₹10,783 करोड़ के तीन अतिरिक्त प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने के प्रोजेक्ट्स में जमीन अधिग्रहण की समस्या और महंगाई के कारण लागत बढ़ने जैसे जोखिम भी निवेशकों के लिए मॉनिटर करना जरूरी होगा।
