भारतीय रेलवे के लिए यह एक चौंकाने वाली खबर है। CAG की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 90% नॉन-सबअर्बन रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए ज़रूरी सुविधाएँ, जैसे साफ पानी और बैठने की जगह, उपलब्ध नहीं हैं। रिपोर्ट में रेलवे मंत्रालय की वित्तीय व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।
CAG की कड़ी फटकार: 90% स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का घोर अभाव!
भारतीय रेल के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है। 12 अगस्त, 2026 को जारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक अहम ऑडिट रिपोर्ट ने भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे और वित्तीय प्रबंधन की पोल खोल दी है। 2019 से 2024 के बीच 5,000 से अधिक नॉन-सबअर्बन रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया गया, जिसमें चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, जांचे गए लगभग 90% स्टेशनों पर यात्रियों को ज़रूरी सुविधाएँ, जैसे कि पीने का साफ पानी, पर्याप्त बैठने की जगह, ठीक-ठाक शौचालय और आश्रय जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी मयस्सर नहीं हैं।
पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, स्वास्थ्य को खतरा!
इन स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता को लेकर रिपोर्ट ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी जाहिर की हैं। जांच में पाया गया कि पानी की सप्लाई व्यवस्था का ठीक से रखरखाव नहीं हो रहा है। कुछ सैंपल्स में तो ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया पाए गए, और क्लोरीन का स्तर भी सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं मिला। यह स्थिति तब है जब नियमों के अनुसार ये सुविधाएँ दी जानी चाहिए, जो साफ तौर पर योजना और क्रियान्वयन में बड़ी खामी की ओर इशारा करता है।
वित्तीय प्रबंधन पर भी CAG की नजर: IRFC को पेमेंट का तरीका!
ऑपरेशनल समस्याओं के अलावा, CAG की रिपोर्ट में वित्तीय चिंताएं भी उजागर हुई हैं। ऑडिटर ने रेलवे मंत्रालय के वित्तीय प्रबंधन के तरीके को 'अस्वास्थ्यकर प्रवृत्ति' करार दिया है। खास तौर पर, सरकार द्वारा दिए गए ग्रॉस बजटरी सपोर्ट (GBS) का इस्तेमाल इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) को लीज चार्जेस का भुगतान करने के लिए किया जा रहा है। इसका मतलब है कि रेलवे अपनी देनदारियों को पूरा करने के लिए आंतरिक संसाधनों के बजाय बाहरी सरकारी सहायता पर निर्भर है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
लिस्टेड रेलवे पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) जैसे IRFC, रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL), IRCON इंटरनेशनल और IRCTC के निवेशकों के लिए यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण है। इन कंपनियों का भविष्य रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय स्वास्थ्य से जुड़ा है। यदि रेलवे मंत्रालय पर इन सुविधाओं को सुधारने और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन को बेहतर बनाने का दबाव बनता है, तो यह फंड आवंटन और प्रोजेक्ट प्रबंधन के तरीकों में बदलाव ला सकता है।
निवेशकों को भविष्य में किसी भी नीतिगत बदलाव या बजट के उपयोग में होने वाले परिवर्तनों पर नजर रखनी चाहिए। यदि सरकार इन सुविधा अंतरालों को दूर करने को प्राथमिकता देती है, तो यह अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गति या विभिन्न रेलवे-संबंधित कंपनियों के लिए फंडिंग मॉडल को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, IRFC को लीज भुगतान के लिए बजटीय समर्थन पर निर्भरता, मंत्रालय और उसकी फाइनेंसिंग आर्म IRFC के बीच वित्तीय संरचना की दीर्घकालिक स्थिरता के लिहाज से एक महत्वपूर्ण बिंदु है जिस पर निवेशकों को गौर करना चाहिए।
