Bharat Heavy Electricals (BHEL) और Titagarh Rail Systems ने **80** Vande Bharat स्लीपर ट्रेनों की मेंटेनेंस के लिए 50:50 का जॉइंट वेंचर बनाया है। यह **₹13,500 करोड़** का बड़ा प्रोजेक्ट है, लेकिन लॉन्ग-टर्म रिस्क के डर से निवेशकों ने आज शेयरों में बिकवाली की है।
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और Titagarh Rail Systems ने दिल्ली में एक नए जॉइंट वेंचर का ऐलान किया है, जिसका मुख्य काम 80 Vande Bharat स्लीपर ट्रेनों की देखभाल करना होगा। यह करार 35 साल के लंबे समय के लिए है, जो दोनों कंपनियों के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है।
डील का गणित
इस जॉइंट वेंचर की शुरुआत ₹50 लाख की पेड-अप कैपिटल के साथ हो रही है। हालांकि यह रकम छोटी दिखती है, लेकिन पूरा प्रोजेक्ट काफी बड़ा है। इसमें ट्रेनों की सप्लाई का हिस्सा लगभग ₹9,600 करोड़ का है, जबकि मेंटेनेंस का काम ₹13,500 करोड़ का अनुमानित है।
बाजार की घबराहट
खबर आने के बाद निवेशकों का मूड कुछ खास अच्छा नहीं दिखा। 15 सितंबर 2026 को BHEL के शेयर 4.21% गिरकर ₹412.85 पर बंद हुए, वहीं Titagarh Rail के शेयरों में 3.65% की गिरावट आई और ये ₹811.45 पर बंद हुए। बाजार जानकारों का मानना है कि निवेशक केवल ऑर्डर को नहीं देख रहे, बल्कि इतने लंबे समय तक के प्रोजेक्ट में इन्फ्लेशन और मेंटेनेंस की चुनौतियों का आकलन कर रहे हैं।
क्या हैं बड़े रिस्क?
35 साल का समय बहुत लंबा होता है। आने वाले समय में महंगाई का बढ़ना और टेक्नोलॉजी में बदलाव कंपनी के मार्जिन (Profit Margin) पर असर डाल सकते हैं। इसके अलावा, BHEL की लिक्विडिटी और Titagarh Rail की प्रॉफिटेबिलिटी कैसे बनी रहती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। अब निवेशकों की नजर मैनेजमेंट की कमेंट्री पर है कि वे इतने लंबे सफर में रिस्क को कैसे मैनेज करेंगे।
